Gold Return : पिछले एक साल में भारतीय वित्तीय बाजार में एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। जहां एक तरफ शेयर बाजार में सुस्ती और गिरावट का माहौल रहा, वहीं दूसरी तरफ सोने ने निवेशकों की चांदी कर दी। पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने ने अपने निवेशकों को 35 प्रतिशत से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है। इसके विपरीत, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 (टोटल रिटर्न इंडेक्स) ने इसी अवधि में 5.4 प्रतिशत का नकारात्मक यानी निगेटिव रिटर्न दर्ज किया है। इस स्थिति को देखकर कई निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब शेयरों को छोड़कर सारा पैसा सोने में लगा देना चाहिए?
35% रिटर्न से चमका सोना! (तस्वीर-AI)
छोटे समय में सोने की चमक, लेकिन लंबी अवधि में शेयर का दबदबा
निवेश सलाहकार फर्म 'फंड्सइंडिया' की अगस्त 2026 की एक शोध रिपोर्ट (वेल्थ कनवर्सेशंस) के अनुसार अगर हम अल्पकालिक (कम समय) के आंकड़ों को देखें, तो सोना कई बार शेयर बाजार से काफी आगे निकल जाता है। लेकिन जब बात लंबे समय के निवेश की आती है, तो शेयर बाजार हमेशा सोने को पछाड़कर ज्यादा संपत्ति बनाने में कामयाब रहा है। साल 2000 से लेकर अब तक के सालाना आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सोने का प्रदर्शन कभी बहुत ज्यादा बेहतर रहा है तो कभी बहुत निराशाजनक। किसी एक साल में सोने ने शेयरों के मुकाबले 79% तक ज्यादा रिटर्न दिया, तो किसी अन्य वर्ष में इसका रिटर्न शेयरों की तुलना में 65% तक कम भी रहा है।
10 से 20 साल में 2 प्रतिशत का बड़ा फर्क
लंबी अवधि के आंकड़े निवेश की एक बिल्कुल अलग कहानी बयान करते हैं। अगर हम 10, 15 या 20 साल के चक्र को देखें, तो निफ्टी 50 का औसत सालाना रिटर्न सोने के मुकाबले औसतन 2 प्रतिशत अधिक रहा है। सुनने में 2 प्रतिशत का यह अंतर बहुत छोटा लग सकता है, लेकिन जब चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) ब्याज का असर 15 से 20 सालों तक पड़ता है, तो यह 2 प्रतिशत का मामूली अंतर लाख-करोड़ रुपये के बहुत बड़े वेल्थ गैप में बदल जाता है। इसलिए, लंबी अवधि में धन सृजन के लिए शेयर बाजार हमेशा पहली पसंद बना रहता है।
पोर्टफोलियो में सोने की असल भूमिका
वित्तीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने और शेयरों की तुलना केवल रिटर्न के आधार पर करना सही नहीं है, क्योंकि आपके इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में दोनों की भूमिकाएं पूरी तरह से अलग हैं। शेयर जहां आपके पैसे को तेजी से बढ़ाने और संपत्ति बनाने का काम करते हैं, वहीं सोना आपके पोर्टफोलियो को सुरक्षा प्रदान करता है। जब-जब वैश्विक तनाव, मंदी या शेयर बाजार में तेज गिरावट आती है, तब-तब सोने के दाम बढ़ते हैं। बीते एक साल का उदाहरण इसका सबसे सटीक प्रमाण है, जहाँ शेयरों में नुकसान के बावजूद सोने ने निवेशकों की पूंजी को डूबने से बचाया।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे सही रणनीति?
एक आम निवेशक अक्सर यह गलती करता है कि जिस संपत्ति में हाल ही में सबसे ज्यादा रिटर्न मिला होता है, वह अपना सारा पैसा उसी में लगाने लगता है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस तरह के ट्रेंड के पीछे भागने से बचना चाहिए। एक समझदारी भरी निवेश रणनीति वही है जिसमें शेयरों और सोने का सही संतुलन हो। आपके कुल निवेश का बड़ा हिस्सा (करीब 70-80%) लंबी अवधि के लिए शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड में होना चाहिए, जबकि 10 से 15% हिस्सा सोने में होना चाहिए। ऐसा करने से आपको लंबी अवधि में बेहतरीन रिटर्न भी मिलेगा और बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा भी बनी रहेगी।
