मंदी का डर हो...या फिर शेयर बाजार में भारी गिरावट सोना हमेशा से निवेशकों का सबसे भरोसेमंद साथी माना गया है। पिछले डेढ़-दो साल में भी यही हुआ... सोने (Gold) ने रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाए। निवेशकों की जमकर चांदी भी हुई, सेंट्रल बैंकों से लेकर लोगों ने अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाया। ऐसा लगने लगा कि सोने की यह चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी। लेकिन इसी बीच सिटीग्रुप की कमोडिटीज रिसर्च टीम ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सोने को लेकर अपना शॉर्ट-टर्म का नजरिया बदल दिया है। बैंक ने अगले तीन महीनों के लिए सोने का टारगेट प्राइस 4,300 डॉलर से घटाकर 4,000 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। आसान भाषा में कहें तो सोने की कीमतों (Gold Crash) में आने वाले समय में 20 फीसदी की बड़ी गिरावट आ सकती है। आइए जानते हैं क्यों और कब...
कब आएगी गिरावट?
हालांकि, बैंक ने निवेशकों को यह भी भरोसा दिलाया है कि सोने में लंबी अवधि की तेजी का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि सिटीग्रुप ने अपने 6 से 12 महीने के लॉन्ग-टर्म टारगेट को 5,000 डॉलर प्रति औंस पर बरकरार रखा है। रिपोर्ट का सबसे मुख्य संदेश यह है कि सोने की कीमतों को मौजूदा ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के लिए बाजार को किसी नए वैश्विक संकट या कमजोर बॉन्ड यील्ड की जरूरत होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर दुनिया में कोई नया भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट नहीं आता है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहती है, तो सोने में खरीदारी की ताकत काफी कमजोर पड़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव साफ दिखाई देगा।
क्यों आएगी गिरावट?
भारतीय बाजार के मौजूदा गणित को देखें तो इस समय 10 ग्राम सोने का भाव लगभग 1,55,000 रुपये के आसपास है। अगर हम भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के एक्सचेंज रेट को 95 रुपये प्रति डॉलर पर स्थिर मान लें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिटीग्रुप के अनुमान के मुताबिक 20 फीसदी की गिरावट आती है, तो भारत में सोने का भाव सीधे 31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक कम हो सकता है। इस गणना के हिसाब से वर्तमान में 1.55 लाख रुपये मिलने वाला सोना घटकर करीब 1,24,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ सकता है, जो आम खरीदारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत होगी।
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हालांकि, सोने के इस पूरे गणित में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट (मोड़) भी शामिल है। भारत में सोने की वास्तविक कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि कई अन्य घरेलू कारकों से भी प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए, अगर आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95 से कमजोर होकर 98 या 100 रुपये के स्तर पर पहुंच जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद भारत में सोने के दाम उतने कम नहीं होंगे। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा सोने पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क (Import Duty), जीएसटी (GST) दरों में बदलाव और त्योहारों व शादियों के सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं तथा केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा की जाने वाली भारी खरीदारी भी कीमतों को नीचे गिरने से रोक सकती है।
