Gold Price: सोना, जिसे हमेशा से सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) माना जाता है, हाल के समय में अपने सबसे बड़े उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजरा है। इस साल सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं लेकिन बाद में इसमें अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। वायदा बाजार में सोना 29 जनवरी 2026 को 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। अब यह गिरकर 145000 रुपये के करीब पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो जनवरी 2026 में सोना करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन मार्च आते-आते यह गिरकर 4,100 से 4,300 डॉलर के बीच आ गया। यानी 20–25% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
सोने में बड़ा उतार-चढ़ाव: रिकॉर्ड ऊंचाई से तेज गिरावट तक (तस्वीर-istock)
क्यों आई थी सोने में इतनी बड़ी तेजी?
सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण थे। सबसे पहला कारण था दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्षों ने निवेशकों को असुरक्षित महसूस कराया। ऐसे माहौल में लोग शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से निकलकर सोने की तरफ बढ़े। दूसरा बड़ा कारण था आसान मौद्रिक नीति यानी बाजार में भरपूर नकदी। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए ब्याज दरें कम रखीं, जिससे लोगों के पास निवेश के लिए ज्यादा पैसा आया। इसी दौरान अमेरिकी डॉलर भी करीब 10% कमजोर हुआ, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो गया और इसकी मांग बढ़ी। तीसरा कारण था ‘डी-डॉलराइजेशन’ यानी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश। अमेरिका का कर्ज बढ़कर करीब 39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव करना शुरू किया। पिछले तीन सालों में केंद्रीय बैंकों ने करीब 1,000 टन सोना खरीदा, जिससे उनके भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13% से बढ़कर 24% से ज्यादा हो गई। भारत ने भी इस ट्रेंड को फॉलो करते हुए अपने सोने के भंडार में इजाफा किया। इन सभी कारणों ने मिलकर सोने की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
अचानक गिरावट क्यों आई?
जितनी तेजी से सोना ऊपर गया, उतनी ही तेजी से नीचे भी आ गया। इसके पीछे भी कई अहम वजहें थीं। सबसे पहले, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। जब कीमतें अपने चरम पर पहुंचीं, तो बड़े निवेशकों और फंड्स ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू की। इससे बाजार में दबाव बढ़ा और कीमतें गिरने लगीं। साथ ही, कई निवेशकों ने उधार लेकर निवेश किया था, जिनकी पोजिशन भी जबरन बंद हुई, जिससे गिरावट और तेज हो गई। दूसरा कारण था भू-राजनीतिक घटनाओं का नया असर। 2026 की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई। तीसरा और सबसे अहम कारण था वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीति। अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसके चलते डॉलर मजबूत हुआ और सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न भी बढ़ गया। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोना कम आकर्षक हो जाता है क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता। इन सभी कारणों के चलते सोने में तेज गिरावट आई। एक हफ्ते में ही सोना 10% से ज्यादा गिर गया, जो कई दशकों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक थी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं और बाजार में थोड़ी स्थिरता के संकेत दिख रहे हैं। कुछ निवेशक इसे सस्ते दाम पर खरीदने का मौका मान रहे हैं। आगे सोने की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी, महंगाई, ब्याज दरें और वैश्विक हालात। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। इससे डॉलर मजबूत रहेगा और सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। लेकिन अगर महंगाई कम होती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बनती है, तो बाजार में फिर से नकदी बढ़ेगी और सोना दोबारा चमक सकता है। इसके अलावा, अगर वैश्विक तनाव और ज्यादा बढ़ता है और आर्थिक मंदी का खतरा गहराता है, तो निवेशक फिर से सोने को सुरक्षित विकल्प के तौर पर चुन सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
सोने के इस उतार-चढ़ाव से निवेशकों को कुछ अहम सबक मिलते हैं। पहला, सोना सुरक्षित जरूर है, लेकिन पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है। इसकी कीमतें भी बड़े आर्थिक बदलावों से प्रभावित होती हैं। दूसरा, सोना पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन इसमें जरूरत से ज्यादा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। तीसरा, इतनी बड़ी गिरावट यह दिखाती है कि सोना अब पहले से ज्यादा अस्थिर हो गया है। ऐसे में एक साथ निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। कुल मिलाकर सोने की चमक थोड़ी फीकी जरूर पड़ी है, लेकिन लंबे समय में इसकी अहमियत अब भी बनी हुई है।
