नई दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के वार्षिक सत्र में कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.5 फीसदी से 7 फीसदी के बीच में रह सकती है। मालूम हो कि यह पहली बार है जब किसी सरकारी अधिकारी ने कहा कि वास्तविक आर्थिक विकास इस वित्तीय वर्ष में 7 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक भारत की स्थिति स्थिर है। एक साथ कई संकटों के बाद भी देश की विकास की गति अच्छी है।
स्थिर है भारत की आर्थिक स्थिति, पॉलीक्राइसिस से गुजर रही है दुनिया
पॉलीक्राइसिस से गुजर रही है दुनिया
नागेश्वरन ने कहा कि दुनिया एक 'पॉलीक्राइसिस' से गुजर रही है, जो उच्च मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति का सख्त होना, उच्च ब्याज दरें, चीन में मंदी जिसने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया और रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) शामिल है।
स्थिर स्थिति में है भारत
द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद से देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, वे अभूतपूर्व हैं। लेकिन भारत एक स्थिर स्थिति में है और विकास की गति अच्छी है। 2022-23 में भारत की विकास दर 6.5 फीसदी से सात फीसदी होगी। 7.4 फीसदी की उच्च मुद्रास्फीति दर के बावजूद इसे अच्छा माना जाता है।
नागेश्वरन ने कहा कि इस समय भारत को व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, विदेशी मुद्रा भंडार और उनके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ाने और कच्चे तेल (Crude Oil) के उच्च आयात के कारण व्यापार घाटे को वित्तपोषित करने की आवश्यकता है।
बढ़ानी होगी पर कैपिटा इनकम
उन्होंने कहा, 'उच्च कच्चे तेल के आयात के कारण व्यापार घाटे को वित्तपोषित करना देश के लिए एक चुनौती है। एफडीआई का प्रवाह स्थिर है, जबकि पोर्टफोलियो निवेश अस्थिर हो गया है क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च ब्याज दरों के कारण यूएसडी आकर्षक हो रहा है।' सीईए ने कहा कि हालांकि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, लेकिन देश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की जरूरत है।
