Adani Group AGM, Gautam Adani Speech:अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि अपने इतिहास में सबसे दमदार नतीजे, मजबूत कैश पोजीशन और सबसे कम डेट रेश्यो के साथ ग्रुप का पोर्टफोलियो का रास्ता बड़ी उपलब्धियों वाला रहा है। ग्रुप का पोर्टफोलियो बेहद मजबूत, सबसे अच्छा समय आना अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक रिश्तों को खराब करने वाली अनिश्चितताओं के बीच दुनिया भारत के उत्थान को देख रही है और यह भारत का क्षण है। अदाणी एंटरप्राइजेज की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के मल्टीपल प्रभाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इस पर फोकस करते हुए फंडिंग में 16 प्रतिशत का इजाफा किया है। जो इस वित्त वर्ष में 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया है। पिछले पांच साल में इस क्षेत्र पर सरकार का खर्च तीन गुना बढ़ा है।
अडानी ग्रुप एजीएम
शेयरधारकों को ये संदेश
शेयरधारकों से कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में हमने 45 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब तक का सबसे अधिक 82,917 करोड़ रुपये (करीब 10 अरब डॉलर) का EBITDA हासिल किया है। इसके कारण हमारा टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 71 प्रतिशत बढ़कर 40,129 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, हमारा डेट टू EBITDA 2.2 गुना पर आ गया है जो कि पहले 3.3 गुना पर था।शानदार प्रदर्शन के कारण अदाणी ग्रुप की लिक्विडिटी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई है और कैश बैलेंस 59,791 करोड़ रुपये है।ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि ये प्रदर्शन हमारी स्थिरता को दिखाता है। इसी के कारण हमारी कंपनियों की रेटिंग और आउटलुक अपग्रेड हुए हैं। मौजूदा समय में अंबुजा, एसीसी और अदाणी पोर्ट एएए रेटिंग की कंपनियां हैं।
सबसे बड़ा रिन्यूएबल प्लांट
अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) गुजरात के खावड़ा में बंजर भूमि पर 30 हजार मेगावाट की दुनिया की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी )परियोजना लगा रहा है।गौतम अदाणी ने कहा, "आप खावड़ा के बारे में कल्पना कीजिए जो दुनिया की कठिनतम परिस्थितियों वाली मरुभूमि में है, और अब वहां सैकड़ों वर्ग किलोमीटर तक फैले दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र का निर्माण हो रहा है। वहां 3,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन शुरू हो गया है, हमने अगले पांच साल में 30 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।यह बेल्जियम और स्विट्जरलैंड जैसे देशों की बिजली की मांग पूरी करने के लिए काफी है।
