16 साल की उम्र, न मां के हाथ का खाना, न पिता का संरक्षण और न ही कोई तय रास्ता... गौतम अडानी ने याद किये अपने संघर्ष के दिन

Gautam Adani Struggle: स्वतंत्रता दिवस से पहले गौतम अडानी ने अपनी शुरुआती संघर्ष यात्रा, अमरीकी केस खारिज होने, हिंडनबर्ग विवाद और FPO वापसी पर बात करते हुए भरोसे, मूल्यों और 'विकसित भारत' के निर्माण पर जोर दिया।

Gautam Adani Struggle : स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले आयोजित 'अपनी बात, अपनों के साथ' के दूसरे संस्करण में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपनी जीवन यात्रा और कंपनी द्वारा हाल ही में पार की गई कानूनी चुनौतियों पर बात की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ग्रुप के विभिन्न प्रोजेक्ट साइटों पर काम करने वाले कर्मचारियों के संघर्ष की तुलना अपने शुरुआती दिनों से की और बताया कि किस तरह देश के युवाओं की मेहनत भारत के भविष्य को नया आकार दे रही है।

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गौतम अडानी के संघर्ष की कहानी (तस्वीर-X)

किशोरावस्था के संघर्ष और प्रोजेक्ट साइट के युवाओं से जुड़ाव

गौतम अडानी (Gautam Adani Journey) ने 16 साल की उम्र में अपने घर से मुंबई के लिए निकले पहले कदम को याद करते हुए कहा कि 16 साल की उम्र, मुंबई की तरफ पहला कदम। न मां के हाथ का खाना, न पिता के संरक्षण का अहसास और न ही कोई तय रास्ता। पास में सिर्फ कड़ी मेहनत का साहस और हर दिन कुछ नया सीखने की इच्छा थी। उन्होंने आगे कहा कि जब देश के कोने-कोने से युवा अपने घरों और परिवारों को छोड़कर आंखों में सपने लिए अडानी ग्रुप की प्रोजेक्ट साइटों पर पहुंचते हैं, तो उन्हें उनमें अपनी ही यात्रा की झलक दिखाई देती है। अपने पसीने से अपना और देश का भविष्य गढ़ने वाले इन लाखों युवाओं में वे अपनी खुद की कहानी देखते हैं।

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