Gandhi Jayanti: जिस नील ने मोहनदास को बनाया महात्मा गांधी, अब उसी से जमकर कमाई कर रहे हैं किसान

Mahatma Gandhi Champaran Movement: पहला सत्याग्रह गांधी जी ने चंपारन (बिहार) में नील की खेती करने वाले किसानों के लिए किया था, जिसकी सफलता के बाद गांधी जी को 'महात्मा' की उपाधि मिली और बापू भी कहा जाने लगा।

KEY HIGHLIGHTS
  • नील की खेती से किसान मालामाल
  • कभी अंग्रेज जबरन करवाते थे खेती
  • नील की खेती में होता है जैविक खाद का इस्तेमाल

Mahatma Gandhi Champaran Movement: 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की याद में गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) मनाई जाती है। इस मौके पर गांधी जी के पहले सत्याग्रह को जरूर याद किया जाता है। ये सत्याग्रह गांधी जी ने चंपारन (बिहार) में नील की खेती करने वाले किसानों के लिए किया था, जिसकी सफलता के बाद गांधी जी को 'महात्मा' की उपाधि मिली और बापू भी कहा जाने लगा।

Mahatma Gandhi Champaran Movement

महात्मा गांधी का चंपारण आंदोलन

अंग्रेज भारतीय किसानों से नील की खेती जबरन करवाते थे। पर किसानों को इससे जमीन के बंजर होने का डर रहता था। हालांकि आज हालात बदल गए हैं।

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