काम के घंटे से लेकर छुट्टियों तक, नए लेबर कोड्स से आपकी 'वर्क-लाइफ' में आएंगे ये बड़े बदलाव

केंद्र सरकार की ओर से करोड़ों कमागारों को बेहतर सुविधा देने के लिए नए लेबर कोड्स लाए गए हैं। इसके बाद राज्य सरकारें भी इस नए कानून को लागू कर रही है।

भारत में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 'छुट्टी' सिर्फ काम से ब्रेक नहीं है, बल्कि यह एक कानूनी अधिकार है। अब नए लेबर कोड्स (Labour Codes) आने के बाद, छुट्टियों को जमा करने और उनके बदले पैसे लेने (Leave Encashment) के नियम बदल रहे हैं। आपको बता दें कि फिलहाल दो तरह के नियम चल रहे हैं: पुराने राज्य के नियम और नए केंद्रीय लेबर कोड। नए कोड के तहत, हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की 'अर्जित छुट्टी' मिलेगी। हालांकि, छुट्टियों को आगे ले जाने की एक सीमा होगी ताकि वे असीमित रूप से जमा न हों।

labour codes

नए लेबर कोड्स

भारतीय कानूनों में तीन तरह की छुट्टियां हैं:

  • अर्जित अवकाश: यह आपके काम किए गए दिनों के आधार पर जुड़ती है। इसका आर्थिक महत्व है क्योंकि इसे कैश कराया जा सकता है।
  • बीमारी और Casual Leave: ये अचानक जरूरत या बीमारी के लिए होती हैं। ये साल के अंत में खत्म हो जाती हैं और इनके बदले पैसे नहीं मिलते।
  • राष्ट्रीय और त्योहारों की छुट्टियां: ये सरकार द्वारा तय की गई फिक्स्ड छुट्टियां होती हैं।

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