Relief to scam victims: जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) का नाम सामने आता है, तो अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और भारी-भरकम प्रॉपर्टी की जब्ती का नजारा आंखों के सामने आ जाता है। लेकिन अब ईडी ने अपनी छवि में बड़ा बदलाव किया है। महज जब्ती तक सीमित रहने के बजाय, एजेंसी अब धोखाधड़ी का शिकार हुए पीड़ितों और बैंकों को उनकी हकदार को उनकी दौलत-संपत्तियाँ लौटाने में जुटी है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो साल में ईडी ने करीब 29,000 करोड़ रुपये कीमत की प्रॉपर्टी को बहाल कर यह साबित कर दिया है कि अब वह केवल कानून का रखवाला नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय का सच्चा वाहक भी बन चुका है। वित्त वर्ष 2023-24 में 22,000 करोड़ रुपये और अप्रैल 2024 से अब तक 7,404 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को लौटाया जा चुका है और सफर यहीं नहीं रुकेगा। अगले दो साल में और 15,000 करोड़ रुपये की बहाली की तैयारी भी जोरों पर है।
घोटालेबाजों की संपत्तियाँ जब्त कर पीड़ितों को राहत दे रहा ED, जानिए पूरी कहानी (इमेज सोर्स-AI)
वसूली करने में ईडी ने किया शानदार काम
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी का रिकवरी रेट भी अन्य कानूनी उपायों जैसे IBC और SARFAESI एक्ट की तुलना में बेहतर रहा है। IBC के तहत रिकवरी दर 36% और 27% रही। SARFAESI एक्ट के तहत 15-25% रिकवरी। डीआरटी और लोक अदालतों में 10% से भी कम रिकवरी। वहीं, ईडी ने अधिकांश मामलों में 50% से अधिक की वसूली की है। कुछ मामलों, जैसे विजय माल्या केस में 100% रिकवरी दर्ज की गई।
ईडी का छापा प्रतीकात्मक फोटो (फोटो साभार - ANI)
ये रहे हाई-प्रोफाइल रिकवरी के मामले
विजय माल्या मामला
ईडी ने विजय माल्या से जुड़े मामले में 14,132 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति 15 बैंकों के समूह को लौटाई, जिसमें 100% रिकवरी हुई।
विजय माल्या से लेकर नीरव मोदी
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी मामला
नीरव मोदी
- नीरव मोदी से 1,052.8 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति बैंकों को लौटी।
- मेहुल चोकसी से 2,566 करोड़ रुपये की संपत्ति वापस की गई।
भूषण पावर एंड स्टील मामला
JSW ग्रुप को 4,025 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति लौटाई गई।
आम निवेशकों को भी राहत
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट्स ही नहीं, बल्कि आम निवेशकों को भी बड़ी राहत दी है। एग्रीगोल्ड पोंजी योजना में ₹3,339 करोड़ की संपत्तियाँ वापस की गईं, जिससे 32 लाख से अधिक निवेशकों को सीधा फायदा हुआ। वहीं, हाल ही में रोज वैली पोंजी योजना में भी ईडी ने ₹500 करोड़ से अधिक की राशि 30 लाख से ज्यादा निवेशकों को लौटाई है। यह कदम ईडी के रणनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत है, जहां अब एजेंसी जब्ती के साथ-साथ संपत्ति लौटाने पर भी पूरा जोर दे रही है।
ED की छापेमारी
रणनीतिक बदलाव का संकेत
वर्ष 2014 से 2024 के बीच ईडी ने 5,155 मामले दर्ज किए, 7,264 सर्च ऑपरेशन चलाए और 755 गिरफ्तारियाँ कीं। पीड़ितों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ईडी फंड के सोर्सों की ट्रैकिंग, फॉरेंसिक जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय कर रही है। हालांकि, कई मामलों में असली पीड़ितों की पहचान करना और फंड ट्रेल को सटीकता से ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसके लिए न्यायालय से शीघ्र मंजूरी लेना जरूरी होता है।
आगे की राह
भविष्य की दिशा की बात करें तो ईडी न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए विधायी संशोधनों की वकालत कर रही है और बैंकों, नियामक संस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। साथ ही, वह दिल्ली शराब नीति घोटाला, अमटेक ग्रुप का ₹20,000 करोड़ घोटाला और महादेव बेटिंग घोटाले जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों की भी सक्रियता से जांच कर रही है। अब जब पुनर्स्थापन ईडी की रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बन चुका है, तो इसके दूरगामी प्रभावों पर सबकी नजर रहेगी।
