भारत की आजादी के 79 साल के सफर में देश ने टेक्नोलॉजी और ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक दूरी तय की है। कभी अपनी बुनियादी जरूरतों, मशीनों और विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने वाला भारत आज वैश्विक स्तर पर सॉफ्टवेयर, डिजिटल पेमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स का पावरहाउस बन चुका है। अब देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), न्यूक्लियर एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के उन्नत क्षेत्रों में भी दुनिया भर में अपना लोहा मनवाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत का एक व्यापक और दूरदर्शी रोडमैप पेश किया।
सेमीकंडक्टर चिप से लेकर 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर तक
देश में चिप का घरेलू उत्पादन शुरू
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की इस अभूतपूर्व प्रगति की नींव देश के समृद्ध स्वदेशी आंदोलन से जुड़ी है, जो आज आधुनिक 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के रूप में सामने आ रही है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण हब बनने के भारत के सपने को अब जमीन पर उतारा जा रहा है। देश में चिप का घरेलू उत्पादन शुरू हो चुका है, जहां वर्तमान में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट काम कर रहे हैं और 6 नए अत्याधुनिक प्लांट जल्द ही चालू किए जाएंगे। चिप्स का महत्व इसलिए अत्यधिक है क्योंकि ये स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, दूरसंचार उपकरण, रक्षा प्रणाली, डेटा सेंटर और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का मुख्य दिमाग होते हैं।
भारत को चिप निर्माण में अग्रणी बनाने के लिए सरकार ने जुलाई 2026 में Semicon 2.0 नीति को मंजूरी दी है, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का विशाल बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, देश को वैश्विक एआई हब बनाने के लिए चलाए जा रहे इंडिया एआई मिशन (IndiaAI Mission) के तहत 10,371.92 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। सुपरकंप्यूटिंग और एआई क्षमताओं को मजबूती देने के लिए 2026 की शुरुआत तक देश में 38,000 से अधिक उच्च-क्षमता वाले जीपीयू (GPUs) को जोड़ा जा चुका है, जो भारतीय टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू किए जाएंगे
प्रौद्योगिकी के अलावा ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए भी भारत ने बड़े कदम उठाए हैं। देश में 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) शुरू किए जाएंगे, जिससे स्वच्छ और निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी तकनीकों के निर्माण के लिए अति-आवश्यक 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals) के उत्पादन और प्रोसेसिंग में भी भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। लाल किले से घोषित ये सभी पहलें स्पष्ट करती हैं कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों का वैश्विक निर्माता और ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
