क्या आप जानते हैं कि बैंक की सिर्फ 7 दिन की छोटी-सी एफडी भी आपको जबरदस्त कमाई करवा सकती है? जी हां! अक्सर हम एफडी को सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाला निवेश मानते हैं, लेकिन अगर इसी एफडी को बार-बार तोड़कर हर हफ्ते दोबारा लगाया जाए, तो इसका असर बिल्कुल SIP जैसा दिख सकता है। मान लीजिए, किसी बैंक की 7 दिन की एफडी पर 2.65% का रिटर्न मिल रहा है। अब सोचिए, अगर इस एफडी को आप पूरे साल तक हर 7 दिन में री-इन्वेस्ट करते रहें, तो आपके ₹30,000 कितने बढ़ जाएंगे? जवाब सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
ऐसे करें कैलकुलेशन
अगर हम इसे सीधे-सीधे जोड़कर देखें तो साल में लगभग 365 दिन होते हैं। यानी, 2.65% × (365/7) = करीब 138.18% रिटर्न सालाना। यह एक अनुमान है, जिसमें हर हफ्ते का रिटर्न सीधा जोड़ दिया गया है।
कम्पाउंडिंग का जादू
असलियत में, जब आप 7 दिन की एफडी को बार-बार री-इन्वेस्ट करते हैं तो उस पर मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। इसे कम्पाउंडिंग कहते हैं। इस हिसाब से सालाना प्रभावी रिटर्न होगा:
(1+0.0265)^(365/7) – 1 = 291.10%
यानि अगर आप हर हफ्ते अपनी एफडी को री-इन्वेस्ट करते हैं, तो आपका पैसा कई गुना तेजी से बढ़ेगा।
इतना ऊंचा रिटर्न सुनकर आपको लग सकता है कि यह तो सोने की खान है। लेकिन हकीकत में किसी भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के लिए सालभर इतना ज्यादा रिटर्न देना संभव नहीं होता। इसमें कई प्रैक्टिकल दिक्कतें आती हैं जैसे बदलती ब्याज दरें, प्रोसेसिंग फीस, और रिस्क फैक्टर।
इसलिए, शॉर्ट टर्म एफडी को कम्पाउंड करके SIP जैसा रिटर्न कैलकुलेशन में तो दिख सकता है, लेकिन असल जिंदगी में इसका फायदा सीमित ही होता है। समझदारी यही है कि एफडी को सुरक्षित निवेश मानें और ज्यादा रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड्स या SIP जैसे विकल्पों पर भी नजर डालें।
