भारतीय Share Market में अब भले ही DII और रिटेल निवेशकों का दबदबा है। लेकिन, FII बाजार की दिशा तय करने में अब भी अहम भूमिका निभाते हैं। BSE-NSE के डाटा के मुताबिक फरवरी 1–15 के दौरान विदेशी निवेशकों ने 15 सेक्टर्स में कुल 33,487 करोड़ रुपये डाले। इसमें सबसे ज्यादा 8,032 करोड़ रुपये कैपिटल गुड्स सेक्टर में आए। जनवरी में यह आंकड़ा 2,761 करोड़ रुपये था। सरकार की ओर से Bharat Heavy Electricals Ltd में 4,470 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बिक्री ने भी इस सेक्टर में फ्लो को सपोर्ट किया। बजट में सेक्टर के लिए कोई नकारात्मक संकेत न होने से भी सेंटिमेंट मजबूत रहा।
किन सेक्टर पर दांव लगा रहे विदेशी निवेशक?
IT में जारी है बिकवाली
विदेशी निवेशकों की तरफ से जहां एक ओर रियल इकोनॉमी से जुड़े सेक्टर्स में पैसा गया, वहीं IT में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है। फरवरी के पहले आधे महीने में IT सेक्टर में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हुई।2025-2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में अब तक IT में करीब 75,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। वहीं, NIFTY IT इंडेक्स इस साल लगभग 15% से ज्यादा गिर चुका है। जबकि NIFTY 50 में 2.6% की गिरावट रही है। इस तरह AI से संभावित डिसरप्शन और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स की ग्रोथ पर असर की आशंका ने विदेशी निवेशकों को सतर्क किया है। हालांकि, बाजार के कुछ जानकार इसे ओवररिएक्शन भी मान रहे हैं।
कहां खरीदारी कर रहे FII?
जनवरी में FII की तरफ से 8,592 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली के बाद फरवरी के पहले पखवाड़े में फाइनेंशियल सर्विसेज में 6,175 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की गई है। खासतौर पर सरकारी बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। मसलन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और पंजबा नेशनल बैंक (PNB) जैसे बैंकों में विदेशी निवेश साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। बेहतर वैल्यूएशन, घटते एनपीए और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ ने इस सेक्टर को आकर्षक बनाया है। Nifty PSU Index भी इस साल अब तक करीब 12% चढ़ चुका है। इसके अलावा FII ने ऑयल एंड गैस सेक्टर में 4,678 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कच्चे तेल की स्थिर कीमतें और बेहतर मार्जिन आउटलुक ने इस सेक्टर को सपोर्ट किया।
सेक्टर रोटेशन का संकेत
डेरिवेटिव्स डेटा में भी बैंकिंग शेयरों में कॉल ऑप्शन की खरीदारी दिख रही है, जो आगे तेजी का संकेत देता है। कुल मिलाकर फरवरी में विदेशी निवेशकों ने सर्विस सेक्टर से पैसा निकालकर कैपिटल गुड्स, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस जैसे “रियल इकोनॉमी” सेक्टर्स में शिफ्ट किया है। यह ट्रेंड आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।
किस बैंक में FII की कितनी हिस्सेदारी
फरवरी में विदेशी निवेशकों ने सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर सेक्टर रोटेशन का साफ संकेत दिया है। State Bank of India, Bank of Baroda, Canara Bank और Punjab National Bank में विदेशी हिस्सेदारी Q4 2025 तक एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। IT से निकलकर बैंकिंग में बढ़ती दिलचस्पी बताती है कि FIIs बेहतर वैल्यूएशन, घटते NPA और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के चलते रियल इकोनॉमी से जुड़े शेयरों पर दांव बढ़ा रहे हैं।
| बैंक | विदेशी हिस्सेदारी (%) |
|---|---|
| State Bank of India | ~10.3% |
| Bank of Baroda | ~9.8–10.0% |
| Canara Bank | ~14.5% |
| Punjab National Bank | ~5.9% |
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