FD vs Small Savings Schemes: जब भी बचत को सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ाने की बात आती है तो एफडी (FD) ही आसान विकल्प नजर आता है। लेकिन सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर भी आकर्षक ब्याज दरें ऑफर की जा रही हैं। ऐसे में FD और Small Savings Scheme में से किसी एक को चुनते समय केवल ब्याज दर देखा जाना ही काफी नहीं है। निवेश की अवधि, पैसे की जरूरत, टैक्स और निकासी के नियम भी समझना जरूरी है।
FD vs Small Savings Schemes कहां मिलेगा ज्यादा फायदा (Photo: iStock)
FD vs Small Savings Schemes ब्याज दर
इस वर्ष जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। PPF (Public Provident Fund) पर 7.1%, NSC (National Savings Certificate) पर 7.7%, SCSS (Senior Citizens Savings Scheme) पर 8.2% और 5 साल की Post Office Time Deposit पर 7.5% ब्याज मिल रहा है। दूसरी ओर, बैंक FD की ब्याज दर की बात करें तो यह निवेश अवधि के हिसाब से अलग-अलग हैं, जो कि अधिकतर बैंकों में 3.05- 7.40 प्रतिशत तक जाती हैं।
निवेश से पहले इन बातों पर दें ध्यान
निवेश की रकम
सबसे पहले यह देखें कि आपको कितनी रकम निवेश करनी है। PPF में एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं, जबकि SCSS में अधिकतम 30 लाख रुपये निवेश की सीमा है। इसके मुकाबले बैंक FD में आमतौर पर इस तरह की सालाना निवेश सीमा नहीं होती। इसलिए बड़ी रकम निवेश करने वालों के लिए FD ज्यादा फ्लेक्सिबल विकल्प हो सकता है।
पैसे की जरूरत
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पैसे की जरूरत है। FD को आमतौर पर मैच्योरिटी से पहले तोड़ा जा सकता है, लेकिन बैंक की शर्तों के अनुसार ब्याज में कटौती या पेनल्टी लग सकती है। छोटी बचत योजनाओं में निकासी के अपने नियम हैं। PPF की अवधि 15 साल है और इसमें तय शर्तों के तहत ही निकासी की जा सकती है। NSC की अवधि पांच साल होती है।
टैक्स नियम
निवेश को लेकर तीसरा अहम फैक्टर टैक्स नियम हैं। बैंक FD से मिलने वाला ब्याज आमतौर पर निवेशक की लागू आयकर दर के अनुसार कर योग्य होता है। वहीं, अलग-अलग छोटी बचत योजनाओं का टैक्स ट्रीटमेंट अलग है। PPF को विशेष टैक्स ट्रीटमेंट मिलता है, जबकि NSC और SCSS से मिलने वाला ब्याज कर योग्य होता है। इसलिए सिर्फ ब्याज दर नहीं, बल्कि टैक्स कटने के बाद मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को देखना चाहिए।
निवेश का उद्देश्य
इसके अलावा निवेश का उद्देश्य भी मायने रखता है। PPF लंबी अवधि की बचत के लिए है, जबकि SCSS पात्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित ब्याज आय का विकल्प है। Post Office Monthly Income Account भी नियमित भुगतान पर आधारित है। FD में बैंक और प्रोडक्ट के अनुसार Cumulative या monthly/quarterly interest का विकल्प मिल सकता है।
कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर
FD या छोटी बचत योजना चुनने से पहले अवधि, लिक्विडिटी, टैक्स और निवेश का उद्देश्य तय करें और उसके बाद ब्याज दर की तुलना करें। केवल सबसे ज्यादा ब्याज देखकर फैसला करने के बजाय यह देखें कि पैसा कब और किस काम के लिए चाहिए।
