EPS पेंशन: लाखों पेंशनभोगियों के हक के लिए BJP सांसद ने PM मोदी को लिखा पत्र, उठाईं 6 बड़ी मांगें!

EPS Pnsion: BJP सांसद अजीत माधवराव गोपछड़े ने PM मोदी को पत्र लिखकर EPS-1995 की उच्च पेंशन में पैरा 26(6) की अड़चनों, प्रशासनिक देरी और असमानता को दूर कर समयबद्ध समाधान की मांग की।

EPS Pnsion : कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) के तहत अधिक पेंशन पाने का इंतजार कर रहे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत की नई उम्मीद जगी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपछड़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ईपीएस की उच्च पेंशन प्रक्रिया में आ रही प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं को दूर करने की मांग की है। हालांकि सरकार का दावा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कर दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि हजारों पेंशनभोगी अब भी ईपीएफओ (EPFO) के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

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पेंशनभोगियों के लिए राहत की आहट

क्या है ईपीएस अंशदान का पूरा मामला और सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सामान्य नियमों के अनुसार, नियोक्ता (कंपनी) कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) का 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस पेंशन फंड में जमा करता है। अब तक पेंशन की गणना के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये तय थी, जिससे पेंशन फंड में अधिकतम योगदान 1,250 रुपये ही हो पाता था। अगर इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जाता है, तो यह योगदान करीब 2,083 रुपये प्रति माह होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर 2022 को एक ऐतिहासिक निर्णय दिया था, जिसमें पात्र कर्मचारियों को अपनी वास्तविक (बिना सीमा वाली) सैलरी पर अंशदान देकर उच्च पेंशन पाने का अधिकार दिया गया था। इस फैसले के सालों बाद भी प्रशासनिक पेचीदगियों के कारण बेहद कम पेंशनभोगियों को वास्तव में बढ़ी हुई पेंशन का लाभ मिल पाया है।

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