कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए रिटायरमेंट के बाद का समय वित्तीय नियोजन (Financial Planning) के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होता है। अक्सर रिटायरमेंट के बाद लोग अपने पीएफ (PF) का पैसा तुरंत नहीं निकालते, यह सोचकर कि फंड सुरक्षित है और इस पर सरकारी ब्याज मिलता रहेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी पीएफ खाते पर ब्याज मिलने की एक समय सीमा (Deadline) होती है? ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित अवधि बीत जाने पर आपका खाता 'इन-ऑपरेटिव' (Inoperative) यानी निष्क्रिय हो जाता है, जिसके बाद ब्याज मिलना बंद हो सकता है।
क्या है EPFO का 3 साल वाला नियम?
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, जब कोई कर्मचारी 55 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके पीएफ खाते पर अगले 36 महीने यानी 3 साल तक ब्याज मिलना जारी रहता है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने रिटायरमेंट के तुरंत बाद पैसा नहीं निकाला, तो भी अगले 3 साल तक आपका पैसा सरकारी ब्याज दर के हिसाब से बढ़ता रहेगा। हालांकि, अगर इन 36 महीनों के दौरान आपने पैसा निकालने के लिए आवेदन नहीं किया या अपने खाते में कोई नया अंशदान (Contribution) नहीं किया, तो 3 साल बाद आपके खाते को 'इन-ऑपरेटिव' घोषित कर दिया जाता है। एक बार खाता इन-ऑपरेटिव होने के बाद उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।
खाता कब माना जाता है निष्क्रिय (Inoperative)?
ईपीएफओ के मौजूदा प्रावधानों के तहत, किसी खाते को इन-ऑपरेटिव तब माना जाता है जब कर्मचारी रिटायर हो गया हो, या स्थायी रूप से विदेश चला गया हो, या उसकी मृत्यु हो गई हो और 36 महीनों तक क्लेम के लिए कोई आवेदन न किया गया हो। अगर आप 55 साल से पहले नौकरी छोड़ देते हैं और किसी नई जगह जॉइन नहीं करते, तो भी आपका खाता 3 साल बाद निष्क्रिय होने की श्रेणी में आ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों और ईपीएफओ के बाद के संशोधनों के अनुसार, चालू खातों (Active accounts) पर ब्याज की गणना अलग तरीके से होती है, लेकिन रिटायरमेंट के मामले में 3 साल की सीमा को समझना जोखिम से बचने के लिए जरूरी है।
ब्याज पर टैक्स का गणित (Taxation Rule)
एक और महत्वपूर्ण बात जो रिटायरमेंट के बाद पीएफ पर ब्याज लेने वालों को पता होनी चाहिए, वह है टैक्स। नौकरी के दौरान पीएफ पर मिलने वाला ब्याज एक सीमा तक टैक्स-फ्री होता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। यानी रिटायरमेंट की तारीख से लेकर पैसा निकालने की तारीख तक जो भी ब्याज आपके खाते में जमा होगा, उसे आपकी 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) माना जाएगा और आपको उस पर अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से इनकम टैक्स देना होगा। इसलिए, लंबे समय तक पैसा खाते में छोड़ना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
देरी करने पर क्या होगा नुकसान?
अगर आप 3 साल की अवधि बीत जाने के बाद भी पैसा नहीं निकालते हैं, तो पहला नुकसान तो ब्याज का रुकना है। दूसरा, निष्क्रिय खातों से पैसा निकालना भविष्य में थोड़ा जटिल हो सकता है, क्योंकि इसके लिए आपको वेरिफिकेशन की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यदि कोई खाता कई वर्षों तक निष्क्रिय पड़ा रहता है और उसका कोई दावेदार नहीं मिलता, तो वह पैसा सरकार के 'सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड' (SCWF) में स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि, आप वहां से भी अपना पैसा क्लेम कर सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया और कठिन हो जाती है।
