किरायेदारों से ली जा रही एंट्री-एग्जिट फीस! जानें क्या RWA वसूल सकती है Move-in Charge?

दिल्ली-एनसीआर की सोसायटियों में RWA द्वारा नए किरायेदारों से 7 से 10 हजार रुपये तक एंट्री फीस वसूलना पूरी तरह गैर-कानूनी और मनमानी है। कानूनन RWA को ऐसा टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है।

रेजिडेंशियल सोसायटियों में किराए पर घर लेने वाले लोगों के लिए अक्सर बाय-लॉज और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के कड़े नियम परेशानी का सबब बन जाते हैं, जिनमें से एक बड़ा मुद्दा शिफ्टिंग के दौरान ली जाने वाली एंट्री-एग्जिट फीस या मूव-इन/मूव-आउट चार्ज (Move-in/Move-out Charges) का है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR), नोएडा, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों की हाई राइज सोसायटियों में RWA द्वारा किरायेदारों से सामान लाते या ले जाते समय हजारों रुपये की फीस वसूली जाती है, जिसके पीछे लिफ्ट और मेंटेनेंस के नुकसान की भरपाई का तर्क दिया जाता है। हालाँकि, कानूनी और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, RWA के पास ऐसा कोई वैधानिक अधिकार (Statutory Power) नहीं होता कि वह किरायेदारों और फ्लैट मालिकों के बीच भेदभाव करके केवल किरायेदारों से मनमाना या असीमित चार्ज वसूले।

Move In charge Rule

क्या RWA वसूल सकती है Move-in Charge?

क्या कहता है नियम?

राज्य सहकारी समिति अधिनियम (State Cooperative Societies Act) और अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट (Apartment Ownership Act) के तहत, RWA का मुख्य कार्य सोसाइटी का रख-रखाव और कॉमन एरिया का प्रबंधन करना है, न कि लाभ कमाना या अवैध शुल्क लगाना। यदि किसी लिफ्ट या कॉमन प्रॉपर्टी को सामान शिफ्ट करने से कोई भौतिक नुकसान पहुंचता है, तो RWA उसकी मरम्मत का वाजिब खर्च या सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) ले सकती है जिसे बाद में रिफंड करना होता है, लेकिन बिना किसी नुकसान के नॉन-रिफंडेबल 'मूव-इन फीस' के नाम पर पैसा वसूलना गैर-कानूनी और उपभोक्ता अधिकारों का हनन माना जाता है।

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