Energy Stocks Rally: कमजोर ग्लोबल बाजार और गिरते सेंसेक्स-निफ्टी के बीच पावर और रिन्यूएबल एनर्जी स्टॉक्स ने 28% तक का दमदार रिटर्न दिया। एनर्जी सिक्योरिटी, स्ट्रक्चरल ग्रोथ और सरकारी पॉलिसी सपोर्ट इस तेजी के बड़े ट्रिगर बने। जहां एक तरफ पिछले एक महीने में बाजार पर दबाव बना रहा, वहीं पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर ने शानदार आउटपरफॉर्मेंस दिखाया।
एनर्जी स्टॉक्स में तेजी
कौनसा स्टॉक कितना चढ़ा?
इस दौरान Premier Energies करीब 28.11% चढ़ा, जबकि Waaree Energies में 15.95% की तेजी आई। ACME Solar ने 18% रिटर्न दिया, वहीं Adani Power और NTPC Green Energy भी दो अंकों में मजबूत बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। इसके अलावा Advait Energy Transitions Ltd में भी करीब 10.5% की तेजी देखने को मिली। इसके उलट, इसी अवधि में सेंसेक्स करीब 8.85% और निफ्टी 50 लगभग 8.79% गिर चुके हैं।
| स्टॉक | CMP (₹) | 1 महीने का रिटर्न (%) | ₹ में बढ़त |
|---|---|---|---|
| Premier Energies Ltd | 921.00 | 28.11% | +197.35 |
| Waaree Energies Ltd | 3,082.00 | 17.26% | +453.70 |
| ACME Solar Holdings | 280.00 | 22.59% | +51.60 |
| Adani Power Ltd | 163.25 | 17.45% | +24.26 |
| NTPC Green Energy | 98.11 | 11.56% | +10.17 |
- पहला, Premier Energies सबसे बड़ा आउटपरफॉर्मर रहा है, जिसने लगभग 28% रिटर्न दिया। यह दिखाता है कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी है।
- दूसरा, Waaree Energies और ACME Solar जैसे प्लेयर्स भी मजबूत तेजी में हैं, जो सेक्टर-वाइड रैली की पुष्टि करता है।
- तीसरा, पारंपरिक पावर प्लेयर जैसे Adani Power और ग्रीन एनर्जी थीम पर फोकस्ड NTPC Green Energy दोनों में समानांतर तेजी दिख रही है, यानी पूरा एनर्जी वैल्यू चेन एक्टिव है।
तेजी के पीछे क्या हैं बड़े ट्रिगर
एनर्जी स्टॉक्स में आई तेजी के पीछे असल में Energy Security बना सबसे बड़ा फैक्टर बना है। ईरान से जुड़े तनाव ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशकों का झुकाव घरेलू पावर और रिन्यूएबल कंपनियों की ओर बढ़ा है, जिन्हें ज्यादा स्थिर और सुरक्षित माना जा रहा है।
500 GW टारगेट से सपोर्ट
भारत का 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी का लक्ष्य इस सेक्टर के लिए लंबी अवधि का बड़ा ग्रोथ ड्राइवर है। भारत सरकार की तरफ से इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी इस सेक्टर में काफी कैपेक्स किया जा रहा है। इसके साथ ही FY30 तक बिजली मांग में करीब 5.8% CAGR की ग्रोथ का अनुमान सेक्टर की मजबूती को और पुख्ता करता है।
इलेक्ट्रिफिकेशन की बढ़ती मांग
डेटा सेंटर, मैन्युफैक्चरिंग और शहरीकरण के चलते बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क में सुधार और सरकारी निवेश से पावर कंपनियों के लिए स्थिर रेवेन्यू विजिबिलिटी बन रही है, जो निवेशकों का भरोसा मजबूत कर रही है।
मैन्युफैक्चरिंग बड़ा गेमचेंजर
सरकार का 2028 से घरेलू सोलर कंपोनेंट्स को अनिवार्य करने का प्लान सेक्टर के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इससे चीन पर निर्भरता कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और घरेलू कंपनियों को लंबी अवधि का फायदा मिलेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
स्पष्ट है कि यह तेजी केवल शॉर्ट टर्म ट्रेंड नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल बदलाव का संकेत है। एनर्जी सिक्योरिटी, सरकारी पॉलिसी और डिमांड ग्रोथ मिलकर इस सेक्टर को अगले कुछ सालों में मार्केट का लीडर बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
