Dollar vs Rupee Currency : घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के चलते भारतीय रुपया सोमवार को अंतर-दिवसीय कारोबार में 34 पैसे कमजोर होकर 89.79 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है, जिसने बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों में चिंता बढ़ा दी है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है, जिससे आयात बिल बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। आयातकों की ओर से डॉलर की भारी मांग बनी रहने के कारण भी रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
कितना गिरा रुपया?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में व्यापार की शुरुआत रुपये ने 89.45 प्रति डॉलर के स्तर पर की थी। हालांकि कारोबार के दौरान यह तेजी से फिसलकर 89.79 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। यह शुक्रवार के बंद भाव 89.45 की तुलना में 34 पैसे की बड़ी गिरावट है। 21 नवंबर को भी रुपया 98 पैसे टूटकर 89.66 प्रति डॉलर के अब तक के निचले बंद स्तर पर पहुंचा था।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.04% बढ़कर 99.50 पर पहुंच गया, जो बताता है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर में मजबूती बनी हुई है।
बाजार का हाल
घरेलू शेयर बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने नए सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था, लेकिन दोपहर तक मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी के चलते ये ऊंचाइयों से नीचे आ गए। सेंसेक्स 122.58 अंक टूटकर 85,584.09 पर और निफ्टी 46.35 अंक गिरकर 26,156.60 पर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.96% की बढ़त के साथ 63.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
वहीं, शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) शुक्रवार को भी बिकवाल रहे और उन्होंने 3,795.72 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। लगातार होती यह बिकवाली रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण बनी हुई है।
इन देशों में दहाड़ रहा भारतीय रूपया
भारत अब दुनिया के कई बड़े और उभरते देशों के साथ सीधे रुपये में व्यापार कर रहा है। रुपये की अंतरराष्ट्रीय पहचान लगातार मजबूत हो रही है और कई देशों ने इसे अपने व्यापारिक लेन-देन में अपनाना शुरू कर दिया है।
रुपये में व्यापार करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, बोत्सवाना, चीन, मिस्र, फिजी, आर्मेनिया, जर्मनी, गुयाना और इंडोनेशिया शामिल हैं। इन देशों ने रुपये को स्वीकार करके भारत के साथ व्यापार को और सरल बना दिया है।
इसके अलावा जापान, केन्या, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मालदीव, मॉरीशस, मंगोलिया, म्यांमार और न्यूजीलैंड भी इस व्यवस्था के तहत भारत के साथ रुपये में कारोबार कर रहे हैं।
यही नहीं, रुपये का दायरा और बढ़ते हुए अब ओमान, कतर, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, तंजानिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), युगांडा, यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) तक पहुंच गया है। इन देशों में भी भारतीय मुद्रा में लेन-देन होने लगा है।
