जब भी हमें पर्सनल लोन, होम लोन या एक नया क्रेडिट कार्ड चाहिए होता है, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक ही बात आती है 'मेरा सिबिल स्कोर (CIBIL Score) कितना है?' आज के समय में इंटरनेट पर ऐसी ढेरों वेबसाइट्स और ऐप्स मौजूद हैं, जो चुटकियों में आपका सिबिल स्कोर मुफ्त में दिखा देते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक बहुत बड़ा डर और भ्रम रहता है कि 'अगर मैं बार-बार अपना सिबिल स्कोर चेक करूंगा तो कहीं मेरा स्कोर कम तो नहीं हो जाएगा?' वित्तीय मामलों की अधूरी जानकारी के कारण लोग इस दुविधा में रहते हैं। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो इसका सीधा और साफ जवाब है नहीं, आपके खुद से बार-बार चेक करने से सिबिल स्कोर कभी कम नहीं होता। लेकिन, इस नियम में एक बहुत बड़ा 'कैच' (ट्विस्ट) भी है। लोन की दुनिया में सिबिल चेक करने के दो अलग-अलग तरीके होते हैं, जिन्हें 'सॉफ्ट इंक्वायरी' (Soft Inquiry) और 'हार्ड इंक्वायरी' (Hard Inquiry) कहा जाता है। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि ये दोनों क्या हैं और किस स्थिति में आपका स्कोर गिर सकता है।
कब सिबिल स्कोर पर नहीं पड़ता असर
सबसे पहले बात करते हैं उस स्थिति की जिससे आपका स्कोर बिल्कुल नहीं गिरता, जिसे वित्तीय भाषा में 'सॉफ्ट इंक्वायरी' (Soft Inquiry) कहते हैं। जब आप खुद किसी ऐप (जैसे Google Pay, Paytm, Paisabazaar) या सीधे सिबिल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं, तो उसे सॉफ्ट इंक्वायरी माना जाता है। इसके अलावा, जब बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनियां आपको 'प्री-अप्रूव्ड' (Pre-approved) लोन या कार्ड के ऑफर देने के लिए बैकग्राउंड में आपका स्कोर चेक करती हैं, तो वह भी सॉफ्ट इंक्वायरी के दायरे में ही आता है। इस तरह की चेकिंग का उद्देश्य सिर्फ जानकारी हासिल करना या आपको ऑफर्स दिखाना होता है, न कि किसी लोन एप्लीकेशन को पास करना। इसलिए, आप दिन में चार बार या महीने में सौ बार भी अपना स्कोर खुद चेक करें, आपके सिबिल स्कोर पर इसका 1% भी बुरा असर नहीं पड़ेगा। बल्कि एक्सपर्ट्स तो यह सलाह देते हैं कि आपको हर महीने अपना स्कोर खुद चेक करना चाहिए ताकि आप यह देख सकें कि आपके नाम पर कोई गलत लोन तो नहीं चल रहा है।
कब गिरता है सिबिल?
अब आते हैं उस असली विलेन पर जिससे आपका सिबिल स्कोर सच में कम हो सकता है, इसे 'हार्ड इंक्वायरी' (Hard Inquiry) कहा जाता है। जब आप किसी बैंक या फाइनेंस कंपनी (NBFC) के पास जाकर बकायदा लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तब बैंक आपकी योग्यता (Creditworthiness) जांचने के लिए सिबिल ब्यूरो से आपकी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट मांगता है। बैंक द्वारा की जाने वाली इस आधिकारिक चेकिंग को 'हार्ड इंक्वायरी' कहते हैं। जब भी कोई बैंक आपके प्रोफाइल पर हार्ड इंक्वायरी करता है, तो आपका सिबिल स्कोर तुरंत कुछ अंकों (आमतौर पर 5 से 10 पॉइंट) के लिए नीचे गिर जाता है। यह गिरावट अस्थाई होती है, लेकिन यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो जाती है और अगले दो सालों तक वहां दिखाई देती है।
असली मुसीबत तब खड़ी होती है जब आप एक ही समय में कई सारे बैंकों में लोन के लिए अप्लाई कर देते हैं। मान लीजिए आपको एक पर्सनल लोन की जरूरत है और आपने बिना सोचे-समझे चार अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट पर जाकर लोन फॉर्म भर दिया। ऐसे में चारों बैंक एक ही समय पर आपके प्रोफाइल पर अलग-अलग 'हार्ड इंक्वायरी' करेंगे। जब सिबिल ब्यूरो यह देखेगा कि बहुत ही कम समय के भीतर आपके अकाउंट पर कई सारी हार्ड इंक्वायरी हुई हैं, तो वह आपको वित्तीय रूप से 'क्रेडिट हंग्री' (Credit Hungry यानी कर्ज का भूखा) मान लेगा। सिबिल को लगेगा कि आप पैसों के गंभीर संकट में हैं और कहीं से भी लोन पाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। नतीजा यह होगा कि आपका सिबिल स्कोर धड़ाम से नीचे गिर जाएगा और बैंक आपका लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट भी कर सकते हैं।
