Credit Card Minimum Due Trap: क्या आप भी भरते हैं सिर्फ मिनिमम ड्यू? जान लें यह राहत है या बैंकों का डेट ट्रैप

समय पर पूरा बिल चुकाने पर कार्डधारक को कैशबैक, रिवार्ड पॉइंट्स और 45-50 दिनों की फ्री-क्रेडिट अवधि जैसे शानदार फायदे मिलते हैं। लेकिन जब बिल भुगतान में लापरवाही बरती जाती है और मिनिमम ड्यू को ही आदत बना लिया जाता है।

आज के दौर में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है। शॉपिंग करने से लेकर यूटिलिटी बिलों का भुगतान करने तक, लोग सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना बेहद आसान होता है, लेकिन जब महीने के अंत में बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड का बिल जनरेट किया जाता है, तब कार्डधारकों को अपनी भारी-भरकम फिजूलखर्ची का अहसास होता है। बैंक अपने ग्राहकों को कुल बिल का भुगतान करने के साथ-साथ 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) भरने का विकल्प भी देते हैं। अधिकांश लोग पूरा बिल चुकाने के बजाय केवल मिनिमम ड्यू भरकर खुद को सुरक्षित और लेट फीस से मुक्त समझ लेते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि यह आसान सा दिखने वाला विकल्प असल में उन्हें एक बड़े कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंसा सकता है और उनके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) को बुरी तरह खराब कर सकता है।

Credit Card Minimum Due

मिनिमम ड्यू भरना जान लें यह राहत है या बैंकों का डेट ट्रैप

क्या है मिनिमम ड्यू?

व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो मिनिमम ड्यू का विकल्प उन लोगों के लिए एक अस्थायी राहत की तरह होता है जो किसी महीने अचानक वित्तीय तंगी का सामना कर रहे होते हैं और पूरा बिल चुकाने में असमर्थ होते हैं। बैंक आपको यह विकल्प इसलिए प्रदान करते हैं ताकि आपका अकाउंट आधिकारिक रूप से 'डिफॉल्ट' न घोषित हो। लेकिन मिनिमम ड्यू भरने का यह कतई मतलब नहीं है कि आपका बाकी कर्ज माफ हो गया है। आमतौर पर मिनिमम ड्यू आपके कुल क्रेडिट कार्ड बिल का लगभग 5 प्रतिशत होता है। जब आप केवल इस न्यूनतम राशि का भुगतान करते हैं, तो बचा हुआ 95 प्रतिशत हिस्सा बकाया कर्ज के रूप में बना रहता है। इसके बाद बैंक उस बची हुई राशि पर भारी-भरकम ब्याज वसूलना शुरू कर देते हैं।

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