क्या सच में SIP में भी होता है नुकसान? एक्सपर्ट्स से जानिए वो सटीक समय, जिसके बाद रिटर्न की गारंटी 100% है!

SIP में आजकल निवेश तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन क्या सच में इसमें भी नुकसान होता है? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो आइए आपको बताते हैं वो सटीक समय, जिसके बाद रिटर्न की गारंटी 100% है!

आज के समय में जब भी निवेश और वेल्थ क्रिएशन की बात आती है, तो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) को सबसे बेहतरीन और सुरक्षित जरिया माना जाता है। लेकिन नए निवेशकों के मन में अक्सर एक बुनियादी और बहुत जरूरी सवाल घूमता रहता है कि 'क्या सच में SIP में भी कभी नुकसान हो सकता है?' वित्तीय विशेषज्ञों और ऐतिहासिक डेटा के विश्लेषण से यह बात पूरी तरह साफ है कि इक्विटी मार्केट से जुड़े होने के कारण शॉर्ट-टर्म (कम समय) में एसआईपी में भी नुकसान होने की पूरी आशंका रहती है। शेयर बाजार में हमेशा उतार-चढ़ाव बना रहता है, इसलिए अगर कोई निवेशक मात्र 1 या 2 साल के लिए एसआईपी करता है, तो बाजार की गिरावट के दौर में उसका पोर्टफोलियो लाल निशान (घाटे) में जा सकता है। बीते परफॉरमेंस को ध्यान में रखते हुए 1 साल की अवधि वाली एसआईपी में नुकसान की संभावना लगभग 22.7 प्रतिशत तक होती है, जिसका सीधा मतलब है कि कम समय के लिए किया गया निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है।

SIP

कैसे बढ़ता है पैसा?

हालांकि, एसआईपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जैसे-जैसे आपके निवेश का समय (Tenure) बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे इसमें नुकसान की संभावना तेजी से घटने लगती है। 30 से अधिक वर्षों के बाजार डेटा और विभिन्न बाजार चक्रों (मार्केट क्रैश और बूम) के गहरे विश्लेषण से विशेषज्ञों ने एक बेहद सटीक समय-सीमा खोजी है, जिसके बाद नुकसान का जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाता है। डेटा दिखाता है कि यदि कोई निवेशक अपनी एसआईपी को लगातार 5 से 6 साल तक जारी रखता है, तो घाटे की संभावना घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह जाती है। वहीं, अगर कोई निवेशक धैर्य के साथ पूरे 10 साल या उससे अधिक समय तक अपनी एसआईपी को बिना रोके चलाता है, तो इतिहास गवाह है कि नुकसान होने की संभावना 'शून्य' यानी 0% हो जाती है। इस 10 साल की जादुई समय-सीमा के बाद बाजार चाहे कितने भी बड़े क्रैश से गुजरे, निवेशक को 100% पॉजिटिव रिटर्न की गारंटी मिल जाती है, और खराब से खराब स्थिति में भी न्यूनतम रिटर्न बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बेहतर ही रहता है।

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