सावधान! सिर्फ प्रीमियम भरना काफी नहीं, इन वजहों से रिजेक्ट हो सकता है हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम

Health Insurance Claim Rejection: स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भरने के बावजूद क्लेम खारिज हो सकता है। इससे बचने के लिए पुरानी बीमारियां न छुपाएं, वेटिंग पीरियड, एक्सक्लूजन, मेडिकल जरूरत और जरूरी दस्तावेजों का हमेशा ध्यान रखें।

Health Insurance Claim Rejection : स्वास्थ्य बीमा की किस्त (प्रीमियम) समय पर भरने और पॉलिसी एक्टिव होने के बाद भी कई बार अस्पताल में भर्ती होने पर क्लेम खारिज (रिजेक्ट) हो जाता है। लोग अक्सर मान लेते हैं कि अगर वे हर साल प्रीमियम दे रहे हैं, तो इलाज का सारा खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाएगी। लेकिन असलियत यह है कि कंपनियां हर क्लेम को पॉलिसी की शर्तों, जैसे कि वेटिंग पीरियड, एक्सक्लूजन (शामिल न की जाने वाली बीमारियां), मेडिकल जरुरत और दस्तावेजों की जांच के बाद ही मंजूर करती हैं। ज्यादातर लोगों को इन शर्तों का पता तब चलता है, जब उन्हें अचानक अस्पताल में क्लेम की जरुरत पड़ती है। आइए जानते हैं वे मुख्य कारण, जिनकी वजह से एक्टिव पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम रिजेक्ट हो सकता है और इंश्योरेंस लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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प्रीमियम भरने के बावजूद हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो गया?

पुरानी बीमारियों की जानकारी न देना

इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की एक सबसे बड़ी और मुख्य वजह पुरानी बीमारियों (प्री-एक्जिस्टिंग डिजीज) को छुपाना या सही जानकारी न देना है। कई बार लोग पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी प्रस्ताव फॉर्म (प्रपोजल फॉर्म) में दर्ज नहीं करते। अस्पताल में भर्ती होने पर जब डॉक्टर मरीज के पिछले रिकॉर्ड्स लिखते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी को पता चल जाता है कि यह समस्या पॉलिसी खरीदने से पहले से थी। अगर आपने अपने डॉक्टर को मौखिक रूप से कोई बात बताई है, लेकिन इंश्योरेंस फॉर्म में नहीं लिखी, तो भी कंपनी इसे धोखाधड़ी मानकर क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए पॉलिसी लेते वक्त अपनी हर छोटी-बड़ी बीमारी की सही जानकारी देना बहुत जरूरी है।

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