RERA के बावजूद लाखों घर खरीदार परेशान, 27 लाख से अधिक होम बायर्स का पैसा फंसा

RERA के तहत बिल्डर को परियोजना की जरूरी जानकारी और मंजूरियां सार्वजनिक करनी होती हैं। साथ ही, खरीदारों से मिली 70% रकम अलग बैंक खाते में रखनी होती है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ जमीन और निर्माण पर किया जा सकता है।

देशभर में लाखों होम बायर्स 10 साल बाद भी अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली-NCR में हजारों की संख्या में EMI भर हैं, लेकिन घर की चाबी नहीं मिली है। आखिर ऐसा क्यों जब घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए RERA कानून लाया गया था। घर खरीदारों के संगठन FPCE ने रियल एस्टेट क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले RERA कानून के राज्यों में प्रभावी तरीके से लागू नहीं होने को इसके पीछे की प्रमुख वजह बताया है। फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (एफपीसीई) ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (रेरा), 2016 के लागू होने के 10 साल पूरे होने पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही। एफपीसीई ने आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि देशभर में करीब 27.6 लाख घर खरीदार आवासीय परियोजनाओं में देरी के कारण फंसे हुए हैं।

Real Estate

रियल एस्टेट

क्यों होम बायर्स का पैसा फंस रहा?

एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि रेरा एक कानून के रूप में विफल नहीं हुआ है, इसके क्रियान्वयन में कमी रही है। और जब क्रियान्वयन कमजोर पड़ता है, तो मजबूत से मजबूत कानून भी व्यवहार में विफल हो जाता है।आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के 'रेरा ट्रैकर’ के दो मार्च, 2026 के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि करीब 27.6 लाख घर खरीदार परिवारों की रकम बिल्डरों के पास फंसी हुई है।

End of Feed