Crude Oil Price Surge : पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध का खतरा गहराने लगा है। इजरायल की तरफ से लेबनान पर नए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच भी मिसाइलें और ड्रोन हमलों की घटनाओं ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को झटका दिया है। इस बढ़ते हुए तनाव की वजह से सोमवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड जहां 96 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। वहीं, WTI क्रूड में भी 4 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। इसकी वजह से भारत समेत दुनिया भर में महंगाई की चिंताएं बढ़ गई है।
क्रूड ऑयल के दाम में तेजी
Hormuz Crisis अब फिर से बढ़ गया है। क्योंकि, इजरायल की तरफ से लेबनान पर हुए हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ हो रही बातचीत को रोक दिया है। इसके साथ ही पिछले दिनों होर्मुज में ट्रैफिक सुधरने लगा था, जिसे ईरान फिर से बंद कर सकता है। निवेशकों को डर है कि यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है, जिससे होर्मुज के साथ ही खाड़ी के दूसरे रास्ते और अहम तेल गैस संसाधन प्रभावित हो सकते हैं।
अभी कितना है क्रूड का भाव?
8 जून की सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 96.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 93.09 डॉलर से 3.34% अधिक है। इसी तरह क्रूड ऑयल 93.46 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 3.23% की तेजी दर्ज की गई। बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट है। निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के बाद इस मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल हो सकती हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उम्मीदों को झटका दिया है।
संघर्ष खत्म होने की उम्मीद को झटका
ईरान ने लेबनान में अपने सहयोगी हिजबुल्लाह पर हुए हमले के जवाब में इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई से बचने का आग्रह करेंगे। इसके बावजूद निवेशकों को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
ओपेक के फैसले से राहत
तेल बाजार को फिलहाल कुछ राहत ओपेक (OPEC) के फैसले से मिली है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक और एक्सपोर्ट करने वाले देशों के इस संगठन ने जुलाई के लिए अपने उत्पादन कोटा में 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी पर सहमति जताई है। हालाकि, फिलहाल बाजार का फोकस सप्लाई बढ़ने से ज्यादा सप्लाई के रूट पर गहराई खतरे पर है। क्योंकि, अब भी दुनिया के पास होर्मुज का कोई विकल्प नहीं है।
भारत के लिए बढ़ेगी चिंता
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अगर ब्रेंट क्रूड लगातार 95-100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना रहता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों, आयात बिल, चालू खाता घाटे और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और होर्मुज की स्थिति पर टिकी रहेंगी।
