भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल का रिकॉर्ड आयात किया लेकिन अब इसमें गिरावट आ रही है। रूस से कच्चे तेल का आयात 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा अपनी खरीद में विविधता लाने के कारण सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 17.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, इस दौरान देश का कुल कच्चा तेल आयात तेजी से बढ़ा है।
कच्चा तेल
कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी
वैश्विक जिंस आंकड़ा और विश्लेषण फर्म केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत का कुल कच्चा तेल आयात औसतन करीब 53 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रहा। यह अगस्त की तुलना में लगभग छह लाख बैरल प्रतिदिन और एक साल पहले की समान अवधि से सात लाख बैरल प्रतिदिन अधिक है। भारत ने सितंबर में औसतन 17.4 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया। यह आयात अप्रैल के 15.8 लाख बैरल प्रतिदिन के बाद सबसे कम है। इसकी तुलना में भारत ने अगस्त में रूस से 20.2 लाख बैरल प्रतिदिन और जुलाई में 26.5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया था।
किन देशों से बढ़ा कच्चे तेल का आयात?
रूस से घटे आयात की भरपाई इराक और सऊदी अरब ने की। इराक ने इस महीने लगभग 5.75 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति की, जो अगस्त में 1.63 लाख बैरल प्रतिदिन थी। इसी तरह सऊदी अरब से आपूर्ति भी अगस्त के 3.47 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर सितंबर में 5.66 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति अगस्त के 5.46 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर 4.80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
रूसी तेल पर अमेरिका की सख्ती!
केपलर में मॉडलिंग के वरिष्ठ प्रबंधक सुमित रितोलिया ने कहा कि रूसी आपूर्ति में यह कमी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका रूसी तेल के खरीदारों पर दबाव बनाना जारी रखे हुए है। इसके चलते भारतीय रिफाइनरी इकाइयरें ने अपने आपूर्ति स्रोतों के विकल्पों को लचीला बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद रूस, भारत के कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति कर रहा है और खरीद के फैसले मुख्य रूप से आर्थिक लाभ, उपलब्धता तथा रिफाइनरी अनुकूलता के आधार पर तय हो रहे हैं।
