Common Bank Charges: क्या आप जानते हैं बैंक कई तरह की सुविधाएं जैसे एटीएम कार्ड, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, चेकबुक और दूसरी बैंकिंग सर्विस के बदले अपने ग्राहकों से अलग-अलग तरह के शुल्क (Charges/Fees) भी वसूलते हैं। ये शुल्क बैंक और खाते के प्रकार (सेविंग्स या करंट अकाउंट) के अनुसार अलग-अलग होते हैं। इस आर्टिकल में बैंक की ओर से लिए जाने वाले इन चार्जेस की ही जानकारी दे रहे हैं-
बैंक आपसे वसूलते हैं ये चार्ज (Photo: iStock)
डेबिट कार्ड चार्ज
अधिकतर बैंक डेबिट कार्ड पर सालाना मेंटेनेंस शुल्क लेते हैं, जो लगभग 100–500 रुपए तक हो सकता है, साथ में जीएसटी भी लगता है। इतना ही नहीं, अगर कार्ड खो जाए या खराब हो जाए तो नया कार्ड बनवाने पर अलग शुल्क देना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त फीस भी लग सकती है।
एटीएम चार्ज
ग्राहकों के लिए एक तय सीमा तक एटीएम से पैसे निकालना मुफ्त होता है। उससे अधिक ट्रांजैक्शन करने पर 20–25 प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क लग सकता है। इसके अलावा, दूसरे बैंक के एटीएम पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या भी कम होती है।
मिनिमम बैलेंस चार्ज
बहुत से ग्राहकों को जानकारी नहीं होती कि खाते में एवरेज मंथली बैलेंज रखा जाना भी जरूरी होता है। अगर खाते में तय औसत मासिक शेष (Average Monthly Balance) नहीं रखा जाता तो बैंक पेनल्टी काट सकता है।
एसएमएस अलर्ट चार्ज
बैंकों की ओर से ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट सुविधा दी जाती है। कुछ बैंक की ओर से यह सुविधा फ्री ऑफ कॉस्ट हो सकती है लेकिन कुछ बैंक एसएमएस अलर्ट सुविधा के लिए 15–25 प्रति तिमाही तक शुल्क लेते हैं।
चेकबुक चार्ज
अगर आप चेक बुक का इस्तेमाल करते हैं तो आपको चेकबुक चार्ज की भी जानकारी होनी चाहिए। बैंक की ओर से ग्राहकों को सीमित संख्या में चेक मुफ्त मिलते हैं लेकिन उसके बाद प्रति चेक शुल्क देना पड़ता है।
NEFT / RTGS / IMPS चार्ज
NEFT, RTGS और IMPS के जरिए पैसे ट्रांसफर करने पर लगने वाले चार्ज बैंक और ट्रांजैक्शन के तरीके पर निर्भर करते हैं। अधिकतर बैंक ऑनलाइन ट्रांसफर (नेट बैंकिंग/मोबाइल बैंकिंग) पर कोई शुल्क नहीं लेते, जबकि ब्रांच से ट्रांजैक्शन करने पर मामूली फीस लग सकती है।
डिमांड ड्राफ्ट (DD) चार्ज
डिमांड ड्राफ्ट (DD) बनवाने पर बैंक एक निश्चित शुल्क लेता है, जो आमतौर पर ड्राफ्ट की राशि के आधार पर तय होता है। यह चार्ज बैंक-टू-बैंक अलग हो सकता है और न्यूनतम व अधिकतम सीमा निर्धारित रहती है।
ECS / ऑटो-डेबिट रिटर्न चार्ज
अगर खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण ECS या ऑटो-डेबिट भुगतान फेल हो जाता है तो बैंक रिटर्न चार्ज वसूल सकता है। यह शुल्क बैंक की नीति के अनुसार तय होता है और हर असफल ट्रांजैक्शन पर अलग से लगाया जा सकता है।
स्टॉप पेमेंट चार्ज
चेक भुगतान रोकने (स्टॉप पेमेंट) के लिए बैंक एक निर्धारित शुल्क लेता है। यह चार्ज प्रति चेक या चेक सीरीज के आधार पर अलग-अलग हो सकता है और ऑनलाइन व शाखा अनुरोध पर शुल्क में अंतर हो सकता है।
खाता बंद करने का शुल्क
अगर ग्राहक निर्धारित अवधि से पहले अपना बैंक खाता बंद करता है तो बैंक क्लोजर चार्ज लगा सकता है। हालांकि कुछ बैंक एक निश्चित समय के बाद खाता बंद करने पर कोई शुल्क नहीं लेते।
