China Defence Budget 2026: ईरान और इजराइल-यूएस युद्ध के बीच चीन ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा करते हुए इसे करीब 275 अरब डॉलर (2,51,85,82,00,00,000 रुपये) तक बढ़ा दिया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 25 अरब डॉलर (22,90,37,87,50,000 रुपये) ज्यादा है। चीन की सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सेना के आधुनिकीकरण और सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए की जा रही है, ताकि वह भविष्य में अमेरिका की सैन्य ताकत के बराबर पहुंच सके।
चीन ने बढ़ाया रक्षा बजट, सेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा खास जोर (तस्वीर-istock)
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में हुआ ऐलान
चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग ने गुरुवार को देश की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) में अपनी सरकारी रिपोर्ट पेश करते हुए रक्षा बजट का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस साल राष्ट्रीय रक्षा के लिए लगभग 1.9 ट्रिलियन युआन यानी करीब 275 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे। यह बजट चीन की सेना को आधुनिक बनाने और नई तकनीकों से लैस करने के लिए अहम माना जा रहा है।
सरकार का दावा, खर्च अभी भी सीमित
चीन की सरकार का कहना है कि रक्षा बजट बढ़ने के बावजूद उसका सैन्य खर्च कई महत्वपूर्ण मानकों पर अभी भी सीमित है। सरकार के अनुसार, देश के जीडीपी में रक्षा खर्च का हिस्सा, प्रति व्यक्ति रक्षा खर्च और प्रति सैनिक रक्षा खर्च जैसे पैमानों पर चीन का बजट अन्य बड़े देशों की तुलना में ज्यादा नहीं है।
लगातार बढ़ रहा है रक्षा बजट
पिछले कुछ सालों से चीन लगातार अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करता आ रहा है। साल 2025 में चीन ने रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद बजट करीब 249 अरब डॉलर हो गया था। यह 2024 की तुलना में करीब 17 अरब डॉलर ज्यादा था। वहीं 2024 में चीन का रक्षा बजट करीबी 232 अरब डॉलर था, जो करीब 1.67 ट्रिलियन युआन के बराबर था। इस तरह देखा जाए तो चीन हर साल अपने सैन्य खर्च को तेजी से बढ़ा रहा है।
दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट
रक्षा खर्च के मामले में चीन दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। अमेरिका का रक्षा बजट अभी भी दुनिया में सबसे बड़ा है, लेकिन चीन तेजी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। चीन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए मजबूत सेना जरूरी है।
भारत और पड़ोसी देशों पर बढ़ रहा दबाव
चीन के रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी से भारत और अन्य पड़ोसी देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को देखते हुए इन देशों को भी अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करना पड़ सकता है। हालांकि आर्थिक चुनौतियों के कारण कई देशों के लिए रक्षा बजट बढ़ाना आसान नहीं है।
तेजी से हो रहा सैन्य आधुनिकीकरण
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम किया है। चीन नए एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है, बड़ी संख्या में आधुनिक युद्धपोत तैयार किए जा रहे हैं, और स्टेल्थ फाइटर जेट जैसी अत्याधुनिक तकनीक को भी सेना में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा मिसाइल सिस्टम, साइबर युद्ध क्षमता और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों पर भी चीन तेजी से निवेश कर रहा है।
बजट आंकड़ों पर उठते हैं सवाल
हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ चीन के रक्षा बजट के आधिकारिक आंकड़ों पर संदेह भी जताते हैं। उनका कहना है कि चीन की सेना जिस तेजी से आधुनिक हथियार और तकनीक विकसित कर रही है, उससे लगता है कि असल सैन्य खर्च घोषित बजट से कहीं ज्यादा हो सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत का असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। खासकर दक्षिण चीन सागर, ताइवान और भारत-चीन सीमा जैसे क्षेत्रों में पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे में चीन का बढ़ता रक्षा बजट आने वाले समय में क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इस तरह चीन का बढ़ता रक्षा खर्च न केवल उसकी सैन्य रणनीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
