ईरान और अमेरिका के बीच जंग थम गई है। अब शांति समझौते की रूपरेखा पर चर्चा चल रही है। दोनों देशों को 60 दिनों के अंदर शांति समझौते पर हस्ताक्षर करना है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अभी भी तकरार जारी है। अभी तक अमेरिका, इजरायल ने ईरान पर हमले में हजारों करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। ईरान को भी इस युद्ध से भारी नुकसान हुआ है।
ईरान अमेरिका युद्ध में चीन बना विनर
होर्मुज बंद होने का खामियाजा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर हुआ है। कच्चे तेल की कीमत में उछाल आने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ी है। होर्मुज ब्लॉकेज के कारण जहां जहां भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश तेल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं चीन ने अपनी दूरदर्शी नीतियों के कारण इस संकट को न सिर्फ आसानी से झेला, बल्कि वह इसका आर्थिक और भू-राजनीतिक फायदा भी उठा रहा है। कैसे, आइए समझते हैं।
1. चीन के पास तेल का विशाल स्टॉक
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थी लेकिन इसका असर चीन पर नहीं हुआ। चीन ने पिछले साल ही कम कीमतों का फायदा उठाकर तेल का बहुत बड़ा इमरजेंसी रिजर्व तैयार कर लिया था। जनवरी 2026 तक चीन के पास इतना तेल जमा था कि वह बिना आयात किए भी 104 दिनों तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है। इसी वजह से उस पर इस संकट का असर नहीं पड़ा।
2. रिन्यूएबल एनर्जी में भारी निवेश
चीन पिछले कुछ सालों से बहुत तेजी से ग्रीन एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। अकेले पिछले साल चीन ने 315 गीगावाट क्षमता के नए सोलर प्लांट लगाए, जो पूरी दुनिया के कुल इंस्टॉलेशन का आधा है। चीन की बिजली का एक बड़ा हिस्सा अब कोयले और रिन्यूएबल से आ रहा है, जिससे तेल-गैस संकट का उसकी इंडस्ट्री पर असर कम हुआ।
3. EV और सोलर पैनल बिजनेस में दबदबा
मिडिल ईस्ट संकट के कारण दुनिया भर के देश अब तेल-गैस पर निर्भरता खत्म करने के लिए ग्रीन एनर्जी और ईवी की तरफ भाग रहे हैं। चूंकि चीन सोलर पैनल और ईवी की ग्लोबल सप्लाई चेन पर राज करता है, इसलिए उसकी चांदी हो गई है। मई में चीन का ईवी एक्सपोर्ट 110% और अप्रैल में सोलर शिपमेंट 60% तक बढ़ गया।
4. अमेरिका छवि नुकसान से फायदा
ग्लोबल लेवल पर चीन इस बात का प्रचार कर रहा है कि अमेरिका एक अस्थिरता पैदा करने वाला देश है, जिसकी मिडिल ईस्ट नीतियों का खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर यूरोप से लेकर भारत में गहरा असंतोष है। इसका फायदा चीन उठा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि चीन इस क्षेत्र में अमेरिका की जगह खुद सुरक्षा प्रदाता नहीं बनना चाहता, लेकिन वह इस संकट को एक चुनौती की तरह मैनेज करके अपने आर्थिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
