अक्सर बेहतर सर्विस, ऊंचे ब्याज दर या नौकरी बदलने के कारण हमें अपना बैंक अकाउंट बदलना पड़ता है। नया अकाउंट खुलवाना तो बहुत आसान है, लेकिन पुराने खाते से जुड़े वित्तीय लेन-देन, जैसे EMI, SIP और बिजली-पानी के बिलों (Auto-debits) को नए खाते में शिफ्ट करना एक बड़ी चुनौती हो सकता है। यदि आप बिना प्लानिंग के पुराना अकाउंट बंद कर देते हैं और नए खाते में मैंडेट सेट नहीं करते, तो आपकी किस्तें बाउंस हो सकती हैं। इससे न केवल आपको भारी बैंक पेनल्टी भरनी पड़ेगी, बल्कि आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर भी खराब हो सकता है। इसलिए, अकाउंट बदलने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक व्यवस्थित तरीका अपनाना बेहद जरूरी है ताकि आपका कोई भी भुगतान बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
ऐसे ट्रांसफर करें ऑटो पेमेंट
सबसे पहले आपको अपने पुराने बैंक स्टेटमेंट की जांच कर उन सभी 'ऑटो-डेबिट' (NACH/ECS) ट्रांजेक्शन की लिस्ट बनानी चाहिए जो हर महीने आपके खाते से कटते हैं। इसमें आपकी होम लोन या कार लोन की EMI, म्यूचुअल फंड की SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम और ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन शामिल हो सकते हैं। एक बार लिस्ट तैयार हो जाने के बाद, आपको नए बैंक अकाउंट के लिए नए 'डेबिट मैंडेट' फॉर्म भरने होंगे। म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में, आप सीधे फंड हाउस की वेबसाइट या कैम्स (CAMS/KFintech) जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर अपना बैंक विवरण अपडेट कर सकते हैं। लोन की EMI के लिए आपको संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान को नए खाते का कैंसिल चेक और ई-मैंडेट फॉर्म देना होगा।
ध्यान रखें ये बात
एक जरूरी सलाह यह है कि जब तक आपके नए खाते से पहली किस्त सफलतापूर्वक न कट जाए, तब तक पुराना बैंक अकाउंट पूरी तरह बंद न करें। पुराने खाते में कम से कम दो महीने की किस्तों के बराबर बैलेंस बनाए रखें। यह 'बफर पीरियड' आपको किसी भी तकनीकी गड़बड़ी से बचाएगा। इसके अलावा, अपने एम्प्लॉयर या कंपनी के एचआर (HR) को समय रहते नए बैंक खाते की जानकारी दें ताकि आपकी सैलरी सही समय पर नए खाते में क्रेडिट हो सके। ध्यान रहे कि गैस सब्सिडी (DBT) और इनकम टैक्स रिफंड जैसे सरकारी लाभों के लिए भी आपको आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना नया बैंक अकाउंट 'वैलिडेट' करना होगा। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदमों को उठाकर आप बिना किसी मानसिक तनाव के अपना बैंक अकाउंट बदल सकते हैं।
