पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत में बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए निवेश करने का एक बेहद लोकप्रिय साधन माना जाता है। ज्यादातर माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर पोस्ट ऑफिस या बैंकों में पीपीएफ खाता खुलवाते हैं ताकि 15 साल की मैच्योरिटी के बाद उनकी पढ़ाई या शादी के लिए एक बड़ा फंड तैयार हो सके। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए बच्चे के पीपीएफ फंड को लेकर बहुत बड़ा और कड़ा कानूनी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी नाबालिग बच्चे के नाम पर जमा कराया गया पैसा पूरी तरह से उसी की निजी संपत्ति होती है। माता-पिता उस रकम के मालिक नहीं, बल्कि केवल एक संरक्षक या ट्रस्टी (Trustee) के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए, माता-पिता बच्चे के पीपीएफ खाते से पैसा निकालकर उसे अपने निजी इस्तेमाल, घर के खर्चों या बच्चे के मेंटेनेंस और कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए एडजस्ट नहीं कर सकते।
मां बाप भी नहीं निकाल सकेंगे पैसा!
इस मामले से समझें पूरा नियम
यह मामला एक पिता और उनकी बेटी के बीच 13 लाख रुपये की मैच्योरिटी रकम के विवाद से जुड़ा हुआ था, जिसमें पिता ने बेटी के बालिग होने के बाद पीपीएफ फंड निकालकर खुद इस्तेमाल कर लिया था। बेटी द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने पर कोर्ट ने पिता को पूरी रकम 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का सख्त आदेश दिया, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। अदालत ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि बच्चे के पालन-पोषण, रहन-सहन और उच्च शिक्षा का खर्च उठाना माता-पिता का कानूनी और नैतिक दायित्व है, जिसे वे अपनी व्यक्तिगत आय से पूरा करने के लिए बाध्य हैं। इस जिम्मेदारी को पूरा करने के बहाने बच्चे की अपनी बचत पूंजी का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। जब तक बच्चा 18 साल का होकर बालिग (Major) नहीं हो जाता, तब तक वह पैसा सुरक्षित रखा जाना चाहिए और बालिग होने के बाद उस खाते का पूरा संचालन और अधिकार केवल बच्चे के हाथों में ही सौंपा जाना चाहिए।
कब निकाल सकते हैं पैसा?
वित्तीय और कानूनी दृष्टिकोण से यह फैसला उन लाखों अभिभावकों के लिए आंखें खोलने वाला है जो बच्चों के नाम पर निवेश तो करते हैं लेकिन आपातस्थिति या जरूरत पड़ने पर उस फंड को अपनी संपत्ति समझकर इस्तेमाल कर लेते हैं। पीपीएफ नियम के अनुसार यह खाता 15 साल के लिए लॉक-इन अवधि के साथ आता है, जिस पर सरकार द्वारा आकर्षक ब्याज दर (वर्तमान में 7.1% वार्षिक) दी जाती है। हालांकि नियमानुसार कुछ शर्तों के तहत partial withdrawal की अनुमति मिलती है, लेकिन अदालत के इस रुख के बाद अब बैंकों और पोस्ट ऑफिस के लिए भी यह सुनिश्चित करना अनिवार्य हो जाएगा कि निकाला गया पैसा केवल बच्चे के सीधे कल्याण के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। अगर आप भी अपने बच्चे के नाम पर पीपीएफ या अन्य स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश कर रहे हैं, तो यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह फंड पूरी तरह से बच्चे का ही रहेगा और उसकी सहमति या 18 साल की उम्र से पहले इसे व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए निकालना कानूनी पचड़े में डाल सकता है।
