क्या बिना आपको बताए बैंक काट सकता है अकाउंट से पैसे? क्या है RBI का नियम

अक्सर लोग इसे बैंक की मनमानी मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे बैंकिंग के कुछ कड़े नियम और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस काम करती हैं। आइए जानते हैं कब बैंक को पैसा काटने का अधिकार है और कब आप इसकी शिकायत कर सकते हैं।

आज के दौर में हम अपनी मेहनत की पूरी कमाई बैंकों में सुरक्षित रखते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मोबाइल पर अचानक 'डेबिट' का मैसेज आता है और बिना किसी ट्रांजैक्शन के हमारे खाते से पैसे कम हो जाते हैं। ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या बैंक को यह हक है कि वह बिना आपकी अनुमति के आपके खाते से पैसे काट ले? अक्सर लोग इसे बैंक की मनमानी मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे बैंकिंग के कुछ कड़े नियम और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस काम करती हैं। आइए जानते हैं कब बैंक को पैसा काटने का अधिकार है और कब आप इसकी शिकायत कर सकते हैं।

Bank Account Balance

बैंक का 'राइट ऑफ सेट-ऑफ' क्या है?

बैंकिंग कानूनों में एक शब्द बहुत महत्वपूर्ण है जिसे 'राइट ऑफ सेट-ऑफ' कहा जाता है। यह बैंक को दिया गया एक विशेष कानूनी अधिकार है। मान लीजिए आपने उसी बैंक से कोई लोन (जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड) लिया है और आप उसकी किश्तें समय पर नहीं चुका रहे हैं। ऐसी स्थिति में बैंक को यह हक है कि वह आपके सेविंग्स अकाउंट में मौजूद बैलेंस का इस्तेमाल आपके लोन की बकाया राशि को चुकाने के लिए कर ले। इसके लिए बैंक को हर बार आपकी अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि लोन एग्रीमेंट साइन करते समय आप अनजाने में इसकी सहमति दे चुके होते हैं। हालांकि, बैंक को ऐसा करने से पहले आपको एक नोटिस देना अनिवार्य होता है।

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