India Post Payments Bank News: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने हाल ही में संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की कार्यप्रणाली में कई गंभीर कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने कई मामलों में बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया, जिससे ग्राहकों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
कैग रिपोर्ट में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की खामियां उजागर (तस्वीर-X)
बिना सत्यापन के खोले गए खाते
CAG की रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता यह जताई गई कि IPPB ने कई खाते बिना मोबाइल नंबर का सही तरीके से सत्यापन किए ही खोल दिए। इतना ही नहीं, कई अलग-अलग ग्राहकों की जानकारी को एक ही मोबाइल नंबर से जोड़ दिया गया। यह एक बड़ी प्रणालीगत कमजोरी मानी जा रही है, क्योंकि इससे धोखाधड़ी और गलत लेनदेन का खतरा बढ़ सकता है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, हर ग्राहक की जानकारी अलग और सुरक्षित होनी चाहिए, लेकिन यहां यह नियम ठीक से लागू नहीं किया गया।
निष्क्रिय और कम उपयोग वाले खाते
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि IPPB के काफी सारे खाते या तो निष्क्रिय हैं या उनका बहुत कम उपयोग हो रहा है। इसका मतलब है कि बैंक ने खाते तो खोले, लेकिन ग्राहकों को सक्रिय रूप से सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित नहीं कर पाया। इससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका।
घर-घर बैंकिंग सेवा में कमी
IPPB की एक खास सेवा डोरस्टेप बैंकिंग यानी ग्राहक के घर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। लेकिन कैग ने पाया कि इस सेवा का उपयोग सीमित रहा। कई ग्राहकों के अनुरोध या तो लंबित पड़े रहे, कुछ को रद्द कर दिया गया और कई मामलों में कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। इससे साफ है कि बैंक अपनी इस महत्वपूर्ण सेवा को प्रभावी तरीके से लागू नहीं कर पाया।
यूपीआई सेवाओं में कमजोर प्रदर्शन
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी IPPB का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, बैंक की यूपीआई सेवाओं में तकनीकी अस्वीकृति दर काफी अधिक रही। वर्ष 2021-22 में यह दर 3.29% और 2022-23 में 7.82% तक पहुंच गई, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इसे 1% से कम रखने का लक्ष्य तय किया है। यह अंतर बताता है कि बैंक की तकनीकी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
अन्य बैंकों से तुलना में पीछे
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2023-24 में आईपीपीबी की यूपीआई सेवाओं में कुल 362 घंटे तक व्यवधान रहा। यह समय अन्य भुगतान बैंकों की तुलना में काफी ज्यादा है। उदाहरण के लिए, फिनो पेमेंट्स बैंक में केवल 19 घंटे, एयरटेल पेमेंट्स बैंक में 52 घंटे और पेटीएम पेमेंट्स बैंक में कोई व्यवधान दर्ज नहीं किया गया। इससे साफ है कि आईपीपीबी तकनीकी स्थिरता के मामले में पीछे है।
सुधार के लिए कैग की सिफारिशें
कैग ने अपनी रिपोर्ट में आईपीपीबी को कई सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है। इसमें खास तौर पर यूपीआई लेनदेन से जुड़े मानकों को पूरा करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की बात कही गई है। साथ ही, ग्राहक डेटा की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को सख्त बनाने की भी जरूरत बताई गई है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह दर्शाती है कि हालांकि आईपीपीबी ने अपने नेटवर्क और ग्राहक आधार को बढ़ाने में प्रगति की है, लेकिन संचालन, तकनीकी और नियामकीय कमियों के कारण उसकी दक्षता प्रभावित हुई है। यदि इन खामियों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो इससे ग्राहकों का भरोसा कमजोर हो सकता है और वित्तीय समावेशन का लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है।
