Supreme Court Direction on Third Party Insurance : सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मोटर इंश्योरेंस नियमों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए नई निजी कारों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि वाहन खरीदते समय एकमुश्त बीमा पर खर्च बढ़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को इस संबंध में तुरंत जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने प्रीमियम की नई दरें तय नहीं की हैं। बीमा अवधि बढ़ने के कारण खरीदारों को शुरुआत में अधिक रकम चुकानी पड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
क्यों लिया गया यह फैसला?
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में दिक्कत आती है और मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य भी प्रभावित होता है। कोर्ट ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में करीब 56% वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। लगभग 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास बीमा नहीं है।
नई कार और बाइक खरीदने वालों पर क्या असर होगा?
अभी तक नई कार खरीदने पर 3 साल और नई बाइक खरीदने पर 5 साल का थर्ड पार्टी बीमा लेना अनिवार्य था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह अवधि क्रमशः 4 साल और 6 साल हो जाएगी। हालांकि, बीमा प्रीमियम कितना होगा, इसका फैसला IRDAI करेगा। लेकिन अवधि बढ़ने से वाहन खरीदते समय एकमुश्त भुगतान बढ़ने की संभावना है। यानी नई कार या बाइक खरीदने की शुरुआती लागत पहले के मुकाबले अधिक हो सकती है।
बिना बीमा वाहन चलाना होगा मुश्किल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब बीमा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को VAHAN और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी किया जा सकेगा। इसके अलावा राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है, जिनसे मौके पर ही वाहन के बीमा की जांच की जा सके।
पेट्रोल पंप को लेकर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और संबंधित एजेंसियों को यह भी सुझाव दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह संभावना तलाशने पर विचार किया जाए कि वैध बीमा रिकॉर्ड को ईंधन आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है या नहीं। इसका उद्देश्य बिना बीमा वाले वाहनों पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
हालांकि कोर्ट ने यह आदेश नहीं दिया है कि बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। फिलहाल यह केवल विचार और पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव है।
किस मामले में आया फैसला?
यह फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम श्रीमती थुंगला धन लक्ष्मी एवं अन्य मामले में आया है। यह मामला 1996 में हुए सड़क हादसे से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और इसी सुनवाई के दौरान देशभर में मोटर इंश्योरेंस व्यवस्था को लेकर व्यापक निर्देश जारी किए।
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