Bullet Train Update News: भारत में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना अब बहुत जल्द सच होने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई या जून 2027 तक शुरू होने की संभावना है। इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का पहला बॉडी फ्रेम बनकर तैयार हो चुका है और वर्तमान में इसे स्क्वीज टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि ट्रायल पूरा होने के 2 से 4 महीनों के भीतर इसे आम यात्रियों की सेवा में समर्पित कर दिया जाएगा।
मेक इन इंडिया बुलेट ट्रेन की उल्टी गिनती शुरू!
डेढ़ घंटे में तय होगा वडोदरा से मुंबई का सफर
बुलेट ट्रेन के शुरू होने से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच यात्रा का समय काफी घट जाएगा। फिलहाल वडोदरा से मुंबई के बीच की दूरी तय करने में घंटों का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन इस सफर को महज डेढ़ घंटे में पूरा कर देगी। इस ऐतिहासिक ट्रेन सेवा का आधिकारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की उम्मीद है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट केवल एक तेज रफ्तार ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में हाई-स्पीड रेल की अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी निर्माण क्षमता को विकसित करने का एक बड़ा कदम है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर का काम तेज
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरे जोरों पर चल रहा है। रेल मंत्री के अनुसार, इस पूरे रूट के सूरत-वापी सेक्शन का काम दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों में सिविल वर्क, नए पुलों का निर्माण, पहाड़ियों में टनल (सुरंगों) की खुदाई और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
दादरी से JNPT तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर का विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान गोल्डन क्वाड्रिलैटरल हाईवे प्रोजेक्ट के साथ ही आया था। उन्होंने कहा कि बाद की कांग्रेस सरकारों ने फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर ध्यान नहीं दिया। जब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश की कमान संभाली, तो फ्रेट कॉरिडोर पर एक किलोमीटर का काम भी पूरा नहीं हुआ था। उनके सत्ता में आने के बाद, उन्होंने हर समस्या का समाधान किया। वैष्णव ने कहा कि चाहे फंड की समस्या हो, डिज़ाइन से जुड़ी दिक्कतें हों या ज़मीन अधिग्रहण से जुड़ी परेशानियाँ, इन सभी का समाधान किया गया।
रेलवे के पूरे सिस्टम का आधुनिकीकरण
सरकार केवल नई ट्रेनें चलाने पर ही नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के पूरे ढांचे में सुधार पर काम कर रही है। वर्षों पुराने रिजर्वेशन सिस्टम, ऑपरेटिंग सिस्टम और कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से बदला जा रहा है। इसके साथ ही, कई पुरानी अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा किया गया है, जिनमें कश्मीर का ऐतिहासिक चेनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ना प्रमुख रूप से शामिल है।
280 स्टेशनों का कायाकल्प और 36,000 किमी नया ट्रैक
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में पिछले कुछ वर्षों में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। देश भर के 280 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित किया गया है और करीब 36,000 किलोमीटर लंबे नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। इसके अलावा माल ढुलाई को तेज करने के लिए वंदे भारत तकनीक पर आधारित कार्गो ट्रेनें भी तैयार की जा रही हैं। कोविड-19 जैसी बड़ी महामारी की चुनौतियों के बावजूद इन प्रोजेक्ट्स की गति धीमी नहीं पड़ी, जिसका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को मिलेगा।
