आमतौर पर माना जाता है कि अच्छा क्रेडिट स्कोर (Credit Score) बनाने के लिए लोन लेना (Loan) या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल करना जरूरी है। लेकिन अगर आप न तो कोई लोन लेते हैं और न ही क्रेडिट कार्ड रखते हैं, तब भी आपके नियमित फाइनेंशियल बिहेवियर से एक क्रेडिट प्रोफाइल (Credit Profile) तैयार करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर किराये के मकान में रहने वाले लोगों के लिए हर महीने समय पर रेंट चुकाने का रिकॉर्ड काम का साबित हो सकता है। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तों को समझना भी आवश्यक है।
बिना Loan और Credit Card के कैसे बनेगी Credit Profile (Photo: iStock)
क्रेडिट हिस्ट्री क्यों है जरूरी
जब कोई व्यक्ति पहली बार बैंक से पर्सनल लोन (Personal Loan), होम लोन (Home Loan) या अन्य किसी तरह का कर्ज लेने जाता है, तो बैंक उसकी वित्तीय स्थिति के साथ क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) भी देखता है। इसमें पहले लिए गए लोन की ईएमआई (EMI), क्रेडिट कार्ड के बिल और पेमेंट का रिकॉर्ड शामिल होता है। जिन लोगों ने कभी लोन नहीं लिया या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं किया, उनके पास दिखाने के लिए क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती। ऐसे लोगों को पहली बार लोन लेने में परेशानी आ सकती है।
क्या समय पर किराया देने से बनेगी क्रेडिट प्रोफाइल?
हर महीने समय पर किराया चुकाना आपकी वित्तीय अनुशासन और भुगतान क्षमता को दिखाता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति हर महीने 20,000 रुपये किराया देता है और नियमित रूप से अपने दूसरे बिलों का भुगतान भी करता है तो यह उसकी आर्थिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। लेकिन केवल मकान मालिक को समय पर किराया देने से यह जानकारी अपने आप सिबिल (CIBIL) या अन्य क्रेडिट ब्यूरो तक नहीं पहुंचती।
इसके लिए किराये के पेमेंट का रिकॉर्ड प्रमाणित होना और संबंधित वित्तीय संस्थानों तक पहुंचना जरूरी है। कुछ कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर RentenPe ने Rent Score (R Score) पेश किया है, जो किराये की पेमेंट के रिकॉर्ड के आधार पर किरायेदार के भुगतान व्यवहार का आकलन करता है। इसका Residence Card पहचान से जुड़े दस्तावेजों, किराये के भुगतान के इतिहास और वैकल्पिक स्कोर को एक साथ रखता है।
क्या इससे लोन मिलने में होगी आसानी?
वैकल्पिक वित्तीय डेटा से बैंक और लोन देने वाली संस्थाओं को किसी व्यक्ति की भुगतान क्षमता समझने में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। हालांकि, इसका फायदा तभी मिलेगा जब संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान इस डेटा को अपनी लोन असेसमेंट प्रक्रिया में स्वीकार करें। इससे लोन मिलने या कम ब्याज दर मिलने की गारंटी नहीं है।
डेटा साझा करने से पहले रखें ध्यान
हालांकि, किसी भी रेंट रिपोर्टिंग सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले यह जरूर जांचें कि आपका डेटा किसके साथ साझा होगा, पेमेंट का रिकॉर्ड कैसे वेरिफाई किया जाएगा और इसके लिए कितनी फीस ली जाएगी।
