Economic Survey 2024-25: संसद में शुक्रवार को पेश इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 (Economic Survey 2024-25) के अनुसार भारत के डेटा सेंटर बाजार के 2032 तक 11.6 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2023 में यह 4.5 अरब डॉलर था। सर्वे कहता है कि भारत के डेटा सेंटर बाजार में पर्याप्त वृद्धि हो रही है, जिसे बुनियादी ढांचे के विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग से बल मिला है। वहीं पिछले 10 साल में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कई गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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प्री-बजट डॉक्यूमेंट में कहा गया, "भारत में डेटा सेंटर बाजार के बढ़कर 2032 तक 11.6 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 10.98 प्रतिशत की सालाना वृद्धि है। यह 2023 में 4.5 अरब अमरीकी डॉलर था।’’ इसमें कहा गया है कि भारत को अपनी अच्छी तरह से स्थापित आईटी और डिजिटल रूप से सक्षम सर्विस इकोसिस्टम के कारण कम निर्माण लागत का लाभ मिलता है।
कई गुना बढ़ा घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन
पिछले 10 साल में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कई गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि, उद्योग का ध्यान मुख्य रूप से असेंबलिंग पर केंद्रित होने से डिजाइन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में सीमित प्रगति ही हुई है। इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 में यह बात कही गई है। शुक्रवार को संसद में पेश वित्त वर्ष 2024-25 की इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भारत का हिस्सा चार प्रतिशत है। लेकिन इसका ध्यान मुख्य रूप से असेंबलिंग गतिविधियों पर ही केंद्रित है।
इकोनॉमिक सर्वे कहती है, ‘‘मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के साथ बेहतर बुनियादी ढांचे, कारोबारी सुगमता और विभिन्न प्रोत्साहनों ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया है और विदेशी निवेश आकर्षित किया है। हालांकि, डिजाइन और कलपुर्जा मैन्युफैक्चरिंग में सीमित प्रगति ही हुई है।’’ समीक्षा के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का घरेलू उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 1.90 लाख करोड़ रुपये था जो 17.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2023-24 में 9.52 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इस दौरान मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग में दर्ज की गई उल्लेखनीय वृद्धि ने आयात पर निर्भरता कम कर दी है और कुल स्मार्टफोन की 99 प्रतिशत जरूरतों को स्वदेश में उत्पादन से पूरा किया जा रहा है। देश ने पिछले वित्त वर्ष में लगभग 33 करोड़ मोबाइल फोन इकाइयों का उत्पादन किया, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक मॉडल 5जी क्षमता से लैस थे। इकोनॉमिक सर्वे कहती है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को गति देने में विशाल घरेलू बाजार, कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता और कम लागत वाले श्रम की अहम भूमिका रही है।
इसके अलावा उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने भी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा दिया है और मोबाइल फोन खंड में खासतौर पर इसका असर देखने को मिला है। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, ‘‘वित्त वर्ष 2022-23 में मूल्य के लिहाज से सिर्फ चार प्रतिशत मोबाइल फोन ही आयात किए गए जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत पर था। मात्रा के लिहाज से यह आयात सिर्फ 0.8 प्रतिशत रह गया। इसी तरह मोबाइल फोन का निर्यात भी बढ़कर 2022-23 में 88,726 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2015-16 में इसका मूल्य शून्य था।
इनपुट- भाषा
