जब 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना बजट 2026 भाषण शुरू किया, तो पूरा देश अपनी सांसें थामे सुन रहा था। आज के इस दौर में, जहां पूरी दुनिया आर्थिक मंदी और युद्ध जैसे संकटों से जूझ रही है, हर भारतीय के मन में बस एक ही सवाल था "क्या भारत इस तूफान में सुरक्षित खड़ा रह पाएगा?" वित्त मंत्री के आत्मविश्वास भरे भाषण ने न केवल इन आशंकाओं को दूर किया, बल्कि यह साफ कर दिया कि भारत अब वह पुराना भारत नहीं रहा जो धीमी गति से चलता था। आज का भारत अब एक 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर सवार हो चुका है, जिसकी रफ्तार और दिशा दोनों ही स्पष्ट हैं।
तेजी से बढ़ रही इकोनॉमी
भारत की अर्थव्यवस्था आज 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो दुनिया की किसी भी प्रमुख इकोनॉमी के मुकाबले सबसे तेज है। एक आम आदमी के नजरिए से देखें तो यह आंकड़ा केवल एक नंबर नहीं है। इसका सीधा मतलब है बाजार में स्थिरता, युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते और घर की रसोई पर महंगाई का कम होता बोझ। सरकार ने यह संदेश दिया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने अपने आर्थिक आधार को इतना मजबूत कर लिया है कि वह बाहरी झटकों को आसानी से झेल सकता है। यह 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ही कमाल है कि आज भारत दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण बन गया है।
12 साल में ऐसी बढ़ी रिफार्म एक्सप्रेस
वित्त मंत्री ने अपने भाषण के दौरान पिछले 12 सालों के उस सफर को याद किया, जिसने देश की तस्वीर बदल दी। उन्होंने बताया कि साल 2014 के बाद से सरकार का पूरा फोकस 'वित्तीय अनुशासन' और 'सस्टेनेबल ग्रोथ' पर रहा है। पिछले एक दशक में दुनिया ने कई आर्थिक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखा महंगाई को काबू में रखना और देश को आत्मनिर्भर बनाना। 'आत्मनिर्भर भारत' अब सिर्फ एक नारा नहीं रह गया है, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था का मूल मंत्र बन चुका है। आज भारत अपनी जरूरतों के लिए दूसरों का मुंह नहीं ताकता, बल्कि खुद को इतना सशक्त बना रहा है कि पूरी दुनिया व्यापार और तकनीक के लिए भारत पर भरोसा कर रही है।
हर घर तक पहुंचेगी रिफार्म एक्सप्रेस
सीतारमण ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत का लक्ष्य अब दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है। लेकिन यह विकास केवल बड़े शहरों या कॉर्पोरेट घरानों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने यह संकल्प लिया है कि 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के फायदे समाज के हर वर्ग तक पहुंचें। चाहे वह खेतों में पसीना बहाने वाला किसान हो, दुर्गम इलाकों में रहने वाले आदिवासी हों, आत्मनिर्भर बनती महिलाएं हों या स्टार्टअप्स के जरिए दुनिया बदलने का सपना देखने वाले युवा विकास की यह लहर सबको साथ लेकर चल रही है।
इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की चर्चा केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे देश की नई पहचान बताया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में साल 2025 को एक ऐसे ऐतिहासिक वर्ष के रूप में देखा जा रहा है, जब भारत ने अपने सुधारों को 'टॉप गियर' में डाल दिया। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सोच और बिना थके की गई मेहनत है। आज जब विदेशी निवेशक और दिग्गज वैश्विक संस्थाएं भारत की प्रशंसा करती हैं, तो यह अहसास होता है कि 12 साल पहले का भारत और आज का भारत दो अलग-अलग कहानियां हैं।
