Bonus Investment Guide: साल में मिलने वाला बोनस अगर बिना प्लानिंग के खर्च हो जाए तो कुछ समय बाद इसका फायदा महसूस नहीं होता। वहीं, अगर बोनस की रकम का सही इस्तेमाल किया जाए तो इससे निवेश बढ़ाने, सुरक्षित बचत बनाने या कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। बोनस मिलने पर इस पैसे एसआईपी में निवेश कर सकते हैं, एफडी करवा सकते हैं या लोन प्रीपेमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन सवाल यही कि इन तीनों में से कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर होगा-
Bonus के पैसे का कहां करें इस्तेमाल (Photo: iStock)
बोनस को SIP में कब करें निवेश
अगर आपका लक्ष्य लंबे समय में पैसा बनाना है और आप बाजार से जुड़े निवेश के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं तो बोनस की रकम को म्यूचुअल फंड SIP या एकमुश्त निवेश के जरिए लगाया जा सकता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में लंबे समय में ज्यादा रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन रिटर्न की गारंटी नहीं होती। बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू अस्थायी रूप से कम भी हो सकती है। इसलिए यह विकल्प उन पैसों के लिए बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनकी तुरंत जरूरत नहीं है।
बोनस का पैसा FD में कब लगाएं
अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते और बोनस को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो FD एक अच्छा विकल्प हो सकता है। FD में निवेश की अवधि और ब्याज दर पहले से तय होती है, जिससे मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि, FD का ब्याज महंगाई और टैक्स के प्रभाव के बाद वास्तविक रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। इसलिए FD का इस्तेमाल उन लक्ष्यों के लिए किया जा सकता है जहां पूंजी की सुरक्षा और निश्चितता प्राथमिकता है।
लोन प्रीपेमेंट से घट सकता है ब्याज
अगर आपके ऊपर होम लोन, पर्सनल लोन या कोई दूसरा कर्ज चल रहा है, तो बोनस से उसका कुछ हिस्सा प्रीपे करना भी विकल्प है। लोन प्रीपेमेंट (Loan Prepayment) करने से बकाया मूलधन कम होता है और आगे लगने वाला ब्याज घट सकता है। खासकर ज्यादा ब्याज दर वाले लोन में इसका असर अधिक हो सकता है। हालांकि, प्रीपेमेंट से पहले अपने लोन की शर्तें और लागू शुल्क जरूर जांच लें।
कौन-सा विकल्प है ज्यादा बेहतर
इन तीनों में कोई एक विकल्प हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सही नहीं माना जा सकता। फैसला लेते समय लोन की ब्याज दर, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और पैसों की जरूरत को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अगर महंगा कर्ज है तो प्रीपेमेंट पर विचार किया जा सकता है, लंबे समय का लक्ष्य है तो SIP विकल्प हो सकता है और सुरक्षित निवेश चाहिए तो FD पर विचार किया जा सकता है। साथ ही बोनस की पूरी रकम एक ही जगह लगाने के बजाय जरूरत के अनुसार अलग-अलग हिस्सों में बांटना भी एक अच्छा तरीका हो सकता है।
