क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले दो दिनों से ऐसा 'भूचाल' आया है जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin), ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। गुरुवार को बिटकॉइन के भाव में 12.6% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जिससे यह $63,300 के स्तर पर आ गया। यह अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि दूसरी सबसे बड़ी करेंसी ईथर (Ether) भी 13% से ज्यादा टूट गई है। अक्टूबर 2025 के अपने रिकॉर्ड हाई से अब तक क्रिप्टो मार्केट कैप से $2 ट्रिलियन (2 लाख करोड़ डॉलर) से ज्यादा की संपत्ति साफ हो चुकी है।
गिरावट के 5 बड़े कारण: आखिर क्यों मची है भगदड़?
विशेषज्ञों और बाजार जानकारों ने इस तबाही के पीछे कई बड़े कारणों की पहचान की है:
1. भारी लिक्विडेशन का 'डोमिनो इफेक्ट'
कॉइनग्लास के आंकड़ों के अनुसार, महज 24 घंटों में लगभग $1 बिलियन की बिटकॉइन पोजीशन जबरन बंद (Liquidate) कर दी गईं। जो निवेशक लीवरेज (उधार का पैसा) लेकर ट्रेडिंग कर रहे थे, उन्हें कीमतों में गिरावट के कारण बाजार से बाहर होना पड़ा। इससे बिकवाली का एक ऐसा चक्र शुरू हुआ जिसने पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया।
2. अमेरिका की सख्त मौद्रिक नीति का डर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन चुनने की खबर ने बाजार को डरा दिया है। निवेशकों को डर है कि वॉर्श 'हॉकिश' (सख्त) रुख अपना सकते हैं और ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी को हमेशा कम ब्याज दरों और ज्यादा लिक्विडिटी से फायदा होता है, लेकिन सख्त नीति इसके लिए बड़ा खतरा है।
3. संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का मोहभंग
डॉयचे बैंक के विश्लेषकों के अनुसार, स्पॉट बिटकॉइन ETF से लगातार पैसा निकाला जा रहा है। अकेले जनवरी 2026 में $3 बिलियन से ज्यादा की निकासी हुई। जब बड़े संस्थान पैसा निकालते हैं, तो छोटे निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है।
4. टेक सेक्टर और AI शेयरों में कमजोरी
आजकल बिटकॉइन का व्यवहार काफी हद तक टेक शेयरों, खासकर AI सेक्टर के साथ मेल खाता है। इस हफ्ते सॉफ्टवेयर और AI कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिसका सीधा असर क्रिप्टो मार्केट पर भी दिखा।
5. वैश्विक अस्थिरता और कीमती धातुएं
सिर्फ डिजिटल एसेट्स ही नहीं, बल्कि सोना और चांदी भी दबाव में हैं। चांदी एक ही सत्र में 18% तक गिर गई, जिससे निवेशकों में जोखिम भरे एसेट्स (Risk Assets) को बेचने की होड़ मच गई।
क्या यह सिर्फ एक छोटी गिरावट है?
कॉइन ब्यूरो के निक पकरिन का मानना है कि क्रिप्टो बाजार अब 'कैपिटुलेशन मोड' में है। इसका मतलब है कि यह कोई छोटा सुधार (Correction) नहीं है, बल्कि एक लंबा 'रीसेट' है जो आने वाले हफ्तों नहीं बल्कि महीनों तक चल सकता है। वहीं, जेफरीज के रणनीतिकार मोहित कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर कीमतें और गिरीं, तो क्रिप्टो माइनर्स (Miners) को अपने ऑपरेशन बंद करने पड़ सकते हैं, जिससे बाजार में और ज्यादा गिरावट आ सकती है।
