Bank of Japan Interest Rate Hike : जापान के केंद्रीय बैंक (BoJ) ने ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की है। जापानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ऑफ जापान ने मंगलवार 16 जून को ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही जापान में बेंचमार्क इंस्ट्रेस्ट रेट बढ़कर 1 फीसदी पर पहुंच गई है। 1995 के बाद जापानी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर अब तीन दशक के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है।
जापान में ब्याज दर बढ़ने का दुनिया पर दिखेगा असर
Nikkei की एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंक का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जापान कमजोर येन, बढ़ती एनर्जी प्राइस और महंगाई के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में नीति को और सख्त (हॉकिश) किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक BOJ की मौद्रिक नीति समिति ने 7-1 के बहुमत से ब्याज दरे में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। बैंक के गवर्नर काजुओ उएदा (Kazuo Ueda) बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, बोर्ड सदस्य तोइचिरो असादा ने दरें स्थिर रखने के पक्ष में मत दिया।
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
BOJ ने की मौद्रिक नीति समिति ने अपने बयान में कहा कि क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का असर अब कंपनियों के बीच होने वाले लेनदेन में तेजी से दिखाई दे रहा है और इसका दबाव धीरे-धीरे उपभोक्ता कीमतों तक पहुंच सकता है। बैंक का मानना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई उसके 2% के लक्ष्य से ऊपर जा सकती है। इसी जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है।
बॉन्ड खरीद में भी होगी कटौती
ब्याज दर में वृद्धि के साथ ही BOJ ने सरकारी बॉन्ड खरीद कार्यक्रम में भी कटौती का ऐलान किया है। बैंक ने कहा कि वह मार्च 2027 तक प्रत्येक तिमाही में अपनी मासिक बॉन्ड खरीद लगभग 200 अरब येन घटाएगा। इसके बाद मासिक खरीद को लगभग 2 ट्रिलियन येन के स्तर पर बनाए रखा जाएगा। यह कदम बाजार में अतिरिक्त नकदी कम करने और वित्तीय परिस्थितियों को सख्त बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्यों अहम है यह फैसला?
जापान कई दशकों तक बेहद कम ब्याज दरों वाली अर्थव्यवस्था रहा है। लंबे समय तक आर्थिक सुस्ती और कम महंगाई से जूझने के कारण BOJ ने ब्याज दरों को लगभग शून्य के आसपास बनाए रखा था। अब दरों को 1% तक पहुंचाना इस बात का संकेत है कि जापान धीरे-धीरे अपनी पुरानी “सस्ते पैसे” वाली नीति से बाहर निकल रहा है। यह जापान की आर्थिक रणनीति में व्यापक बदलाव का संकेत है।
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसलिए वहां की मौद्रिक नीति में बदलाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसकी वजह से भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश में कटौती देखने केा मिल सकती है। जापान की ब्याज दर “कैरी ट्रेड” को प्रभावित कर सकती है। वर्षों से निवेशक कम ब्याज पर येन में कर्ज लेकर अन्य देशों में निवेश करते रहे हैं। जापान में दरें बढ़ने से यह रणनीति कम आकर्षक हो सकती है, जिससे वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
