राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक्सिस बैंक को दिल्ली स्थित प्रोकेयर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 3.19 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है। दरअसल, आयोग ने एक्सिस बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। यह मामला 2016 की नोटबंदी से जुड़ा है। नोटबंदी के दौरान एक्सिस बैंक ने नोटों को जमा करने से मना किया था।
नोटबंदी की एक गलती एक्सिस बैंक पर पड़ी भारी (Photo: iStock)
बैंक ने अनसुना किया ग्राहक का अनुरोध
भाषा (पीटीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने कंपनी की बैंक के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई की। आयोग में पीठासीन सदस्य एवीएम जे. राजेंद्र और न्यायिक सदस्य अनूप कुमार मेंदीरत्ता शामिल थे। आयोग ने 10 मार्च के आदेश में कहा कि बैंक ने बार-बार अनुरोध के बावजूद शिकायतकर्ता को अपने केवाईसी वेरिफाइड खाते में नोट जमा करने से रोक दिया और यह समस्या नोटबंदी की पूरी अवधि तक बनी रही।
नोट स्वीकार करना बैंक की मुख्य जिम्मेदारी
आयोग ने कहा कि बैंक के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं था कि वह ग्राहक के पैसे जमा करने से सीधे मना कर दे। अगर बैंक को पैसों पर कोई शक था, तो वह इसकी सूचना अधिकारियों को दे सकता था, लेकिन नोट स्वीकार करना बैंक की मुख्य जिम्मेदारी थी।
कंपनी को इन नोटों की वजह से हुआ नुकसान
बैंक द्वारा जमा करने से मना करना कंपनी को नोटबंदी के दौरान एकमात्र वैध अवसर से वंचित करने के बराबर था। इसके कारण कंपनी को नुकसान हुआ, क्योंकि जमा न किए गए नोट समय सीमा समाप्त होने के बाद बेकार हो गए।
खाते में जमा स्वीकार करना एक मूल बैंकिंग सेवा
आयोग ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से सेवा में कमी के अंतर्गत आता है। आयोग ने यह भी कहा कि खाते में जमा स्वीकार करना एक मूल बैंकिंग सेवा है और बैंक को कानून के अनुसार काम करना चाहिए। अगर कोई लेनदेन रोकना हो, तो उसका कारण स्पष्ट और नियमों के अनुसार होना चाहिए।
