घर खरीदना किसी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती है। भारत में लोगों की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक घर खरीदना होता है। हालांकि, यह एक बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी भी है क्योंकि ज्यादातर लोग होम लोन लेकर घर खरीदते हैं। लोन की अवधि आमतौर पर 20 साल होती है और खरीदार कम से कम 25-30% डाउन पेमेंट करने की कोशिश करते हैं।
घर की खरीदारी
अधिकांश लोग घर खरीदने से पहले होम लोन की ईएमआई का कैलकुलेशन करते हैं। उसके बाद आने वाले खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। ये खर्च किसी लोन स्टेटमेंट में नहीं दिखते, फिर भी बड़ा बोझ डालते हैं। इसीलिए घर खरीदने के बारे में सोचते समय, आपको अतिरिक्त भुगतानों और खर्चों के लिए तैयार रहना चाहिए, ताकि आपकी बचत या इमरजेंसी फंड पर कोई बुरा असर न पड़े।
EMI के अलावा इन खर्चों के लिए रहें तैयार
इंटीरियर खर्च: अगर आप फ्लैट खरीदते हैं तो उसमें रहने के लिए आपको इंटीरियर करना होगा। अगर आप सिंपल इंटीरियर कराते हैं, जिसमें वार्डरोब, किचन, रैक आदि बनवाते हैं तो कम से कम 2 से 3 लाख रुपये खर्च होंगे।
मेंटेनेंस चार्ज: सोसायटियों में अपार्टमेंट्स सिक्योरिटी, लिफ्ट, पानी और कॉमन एरिया के लिए हर महीने फीस लेते हैं। ये हर साल बढ़ते हैं, जिसका मतलब है कि आपको EMI के अलावा अपनी जेब से एक्स्ट्रा पैसे देने के लिए तैयार रहना होगा।
प्रॉपर्टी टैक्स: भारत में प्रॉपर्टी टैक्स एक सालाना या छमाही डायरेक्ट टैक्स है जिसे लोकल म्युनिसिपल बॉडीज लगाती हैं। घर के मालिक के तौर पर, आपको नियमों और समय-सीमाओं के बारे में जानकारी रखनी चाहिए ताकि किसी भी संभावित पेनल्टी से बचा जा सके।
मरम्मत और फर्निशिंग: घर का मालिक बनने के बाद सीपेज, पेंट, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल ठीक-ठाक रखने जैसी चीज़ें आपकी अतिरिक्त जिम्मेदारियां बन जाती हैं। आपको अपने घर की कीमत का कम से कम 1% हिस्सा हर साल अलग रखना चाहिए ताकि आप अपने दूसरे प्लान्स पर असर डाले बिना इन खर्चों को संभाल सकें।
होम इंश्योरेंस: इसमें आपके घर में आग लगने, चोरी होने और प्राकृतिक कारणों से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है। कई लोग पैसे बचाने के लिए इसे नहीं करवाते, लेकिन आपको यह तय करना होगा कि आपको सुरक्षा चाहिए या आप जोखिम उठाने को तैयार हैं।
यूटिलिटी बिल: किराए के घर में आपके यूटिलिटी बिल शायद उतने ज़्यादा न हों। लेकिन जब आप अपना बड़ा घर खरीदते हैं, तो बिजली, पानी और गैस के बिल ज़्यादा आ सकते हैं।
