August Salary Budgeting: महीने की पहली तारीख नौकरीपेशा लोगों के लिए खास होती है। सैलरी अकाउंट में क्रेडिट होते ही चेहरे पर खुशी आ जाती है। लेकिन अगर महीने की शुरुआत में पैसों का सही प्लान न बनाया जाए तो यही खुशी महीने के आखिरी दिनों तक चिंता में बदल सकती है। किराया, EMI, राशन, बिजली का बिल, बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग और दूसरी जरूरतों में पैसा खर्च होता चला जाता है और आखिर में सेविंग के नाम पर अकाउंट में कुछ खास नहीं बचता। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो महीने की शुरुआत में ही सैलरी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने का तरीका अपनाया जा सकता है। इसके लिए 50-30-20 Rule एक आसान फॉर्मूला है। पैसों को मैनेज करने का यह फॉर्मूला कैसे काम करता है आइए एक उदाहरण से समझते हैं-
1 सितंबर को ही बना लें सैलरी का पूरा प्लान (AI Generated Image)
क्या है 50-30-20 Rule?
50-30-20 रूल के मुताबिक आपकी मंथली इनकम का 50 प्रतिशत हिस्सा जरूरतों के लिए, 30 प्रतिशत इच्छाओं के लिए और 20 प्रतिशत बचत या निवेश के लिए रखा जाना चाहिए।
मान लीजिए कि आपकी इन-हैंड मंथली सैलरी 50 हजार रुपये है। 50,000 की सैलरी को तीन हिस्सों में बांटे तो 50 प्रतिशत यानी 25,000 जरूरतों के लिए, 30 प्रतिशत यानी 15,000 अपनी इच्छाओं पर खर्च करने के लिए और 20 प्रतिशत यानी 10,000 बचत और निवेश के लिए अलग रख सकते हैं।
25,000 रुपये कहां खर्च करें
सबसे पहले सैलरी का 50 प्रतिशत यानी 25,000 रुपये उन खर्चों के लिए रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी का बिल, जरूरी यात्रा खर्च, EMI, मोबाइल या इंटरनेट बिल और रोजमर्रा की दूसरी आवश्यक चीजें शामिल हो सकती हैं।
15,000 रुपये कहां खर्च करें
सैलरी का अगला 30 प्रतिशत यानी 15,000 रुपये उन चीजों के लिए रखा जा सकता है जो जरूरी तो नहीं हैं, लेकिन आपकी लाइफस्टाइल और खुशी के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बाहर खाना, मूवी देखना, शॉपिंग, घूमना, ऑनलाइन ऑर्डर या मनोरंजन से जुड़े खर्च शामिल हो सकते हैं।
इस हिस्से का फायदा यह है कि आपको हर खर्च को लेकर अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है। अगर 15,000 का बजट तय है तो आप उसके अंदर अपनी पसंद की चीजों पर पैसा खर्च कर सकते हैं।
10,000 रुपये बचत और निवेश के लिए
आखिर में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है। 50,000 रुपये की सैलरी में 20 प्रतिशत यानी 10,000 बचत और निवेश के लिए अलग रखें। यहां सबसे जरूरी बात है कि बचत को महीने के आखिर में बची रकम न बनाएं। सैलरी आते ही 10,000 रुपये अलग कर दें। अगर आप इसे खर्च करने के बाद बची रकम से करने की कोशिश करेंगे तो कई बार महीने के अंत तक पैसा बच ही नहीं पाएगा।
इस 10,000 को आपके वित्तीय लक्ष्य के अनुसार सेविंग, इमरजेंसी फंड या निवेश में लगाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति अपने भविष्य के बड़े खर्च के लिए पैसा जमा कर सकता है या अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार निवेश का विकल्प चुन सकता है।
