हर बार गोल्ड पर आप देते हैं डबल टैक्स और आपको मालूम भी नहीं?

गोल्ड ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों से बिल में सोने की कीमत और उसे गहने में ढालने की मजदूरी दोनों पर GST वसूला जाता है। आइए जानते हैं कि यह टैक्स सिस्टम कैसे काम करता है और खरीदारी के वक्त आपको किन जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए।

Gold Tax: भारत में सोना (Gold) खरीदना सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक परंपरा और भावनात्मक अहसास भी है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप ज्वेलर के पास जाते हैं, तो सोने का जो भाव टीवी या अखबार में दिखता है, बिल उससे कहीं ज्यादा क्यों हो जाता है? अक्सर ग्राहकों को लगता है कि वे टैक्स के नाम पर ज्यादा पैसे दे रहे हैं। असल में, ज्वेलरी के बिल में कुछ ऐसी बारीकियां होती हैं जिन्हें न समझने के कारण कई बार आपको ऐसा लग सकता है कि आप 'डबल टैक्स' दे रहे हैं। खरीदारी से पहले इस गणित को समझना आपकी मेहनत की कमाई बचाने के लिए बेहद जरूरी है।

Gold

कैसे लगता है सोने पर टैक्स?

जब आप सोने के गहने खरीदते हैं, तो टैक्स केवल एक जगह नहीं लगता। सबसे पहले सोने के आयात (Import) पर 'कस्टम ड्यूटी' लगती है, जो सोने की बेस कीमत में पहले से ही शामिल होती है। इसके बाद, जब वह सोना गहने की शक्ल में आपके पास आता है, तो सरकार उस पर 3% जीएसटी (GST) लगाती है। यह 3% जीएसटी केवल सोने की कीमत पर ही नहीं, बल्कि 'मेकिंग चार्जेस' (गहने बनाने की मजदूरी) पर भी लागू होता है। यहीं पर ग्राहकों को भ्रम होता है कि उन्हें सोने और मजदूरी दोनों पर अलग-अलग टैक्स क्यों देना पड़ रहा है।

End of Feed