एफआईए (Federation of Indian Airlines) ने सरकार से विमानन ईंधन यानी एटीएफ (ATF) की बढ़ती कीमतों पर जल्द राहत देने की मांग की है। एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि ईंधन की महंगाई के कारण पूरा विमानन उद्योग भारी दबाव में आ गया है और अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया, तो उड़ान संचालन तक प्रभावित हो सकता है।
ATF (Photo: iStock)
एटीएफ की कीमतों में राहत की मांग
पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की भागीदारी वाले इस संगठन एफआईए ने नागर विमानन मंत्रालय को पत्र लिखकर कई मांगें रखी हैं। इनमें एटीएफ की कीमतों में राहत, टैक्स में कटौती और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए समान कीमत तय करने की बात शामिल है।
एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च ईंधन होता है। कुल खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ एटीएफ पर ही खर्च होता है। ऐसे में अगर ईंधन महंगा हो जाता है, तो कंपनियों के लिए उड़ान चलाना मुश्किल हो जाता है।
ईंधन की खपत और खर्च बढ़ रहा
एफआईए के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसके अलावा, कई देशों में हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
एयरलाइंस ने यह भी बताया कि सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी को 15 रुपये प्रति लीटर तक सीमित किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह बढ़ोतरी 73 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इससे विदेशी उड़ानों पर भारी असर पड़ा है और कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को हटाने की मांग
इसके अलावा, एयरलाइंस ने एटीएफ पर लगने वाले 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को कुछ समय के लिए हटाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि रुपये की कमजोरी के कारण भी लागत बढ़ रही है। एफआईए का कहना है कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही, तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बीच संतुलन बिगड़ जाएगा और पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है।
