AI नहीं छीन पाएगा आपकी नौकरी, तकनीक के नाम पर छंटनी को बताया गैरकानूनी

नैसकॉम के अनुसार, कोडिंग, टेस्टिंग और बेसिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे कामों में एआई इंसानों की जगह ले रहा है। भारत के 50 लाख से ज्यादा आईटी प्रोफेशनल्स को अपनी स्किल बदलने की जरूरत है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण दुनियाभर में लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। कई आईटी कंपनियों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी भी की गई है। इस बीच नौकरीपेशा वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। एक चीनी अदालत ने फैसला सुनाया है कि कंपनियां, कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरी से नहीं निकाल सकती है। ऐसा तब हो रहा है जब अधिकारी एक तरफ घरेलू लेबर मार्केट को स्थिर रखने की ज़रूरत और दूसरी तरफ़ AI टेक्नोलॉजी विकसित करने की वैश्विक होड़ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह फैसला भले ही चीन से जुड़ा है लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में भारत समेत दुनियाभर में होगा। कंपनियां AI के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगी।

AI Impact on Jobs

AI और नौकरी

चीन से जुड़ा है मामला

हांग्जो इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट के एक बयान के अनुसार, अदालत ने फैसला दिया कि पूर्वी चीन की एक टेक कंपनी ने अपने एक कर्मचारी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया था। कर्मचारी ने तब डिमोशन (पद घटाए जाने) को स्वीकार करने से मना कर दिया था, जब AI के जरिए उसकी नौकरी को ऑटोमेटेड कर दिया गया था। 28 अप्रैल के एक अदालत ने कहा कि कंपनी ने नौकरी से निकालने के जो कारण बताए, वे बिजनेस में कटौती या कामकाज में मुश्किलों जैसी नकारात्मक परिस्थितियों के दायरे में नहीं आते थे, न ही वे उस कानूनी शर्त को पूरा करते थे जिसके तहत 'रोजगार का अनुबंध जारी रखना असंभव' हो जाता। इसी मामले का हवाला देते हुए, अदालत ने एक अलग बयान में कहा कि कंपनियां तकनीकी प्रगति के कारण कर्मचारियों को एकतरफा तरीके से नौकरी से नहीं निकाल सकतीं या उनकी सैलरी में कटौती नहीं कर सकतीं।

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