8th Pay Commission Pension : 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग ने जुलाई में कोलकाता और भुवनेश्वर का दौरा पूरा कर लिया है और अब वह अपने गठन के करीब 9 महीने पूरे करने की ओर बढ़ रहा है। सरकार द्वारा दिए गए 18 महीने के समय में आयोग करीब आधा सफर पूरा करने वाला है। आने वाले महीनों में आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारियों, संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा कर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इस बीच 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर पेंशन व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। सरकार की गजट अधिसूचना में जहां राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत मिलने वाले लाभों की समीक्षा की बात कही गई है, वहीं कर्मचारी संगठन लगातार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
8वें वेतन आयोग पर कर्मचारियों की मांग
गजट नोटिफिकेशन में NPS और UPS की समीक्षा पर जोर
नवंबर 2025 में जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, 8वें वेतन आयोग को NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग को यह भी देखने को कहा गया है कि मौजूदा पेंशन व्यवस्था में कहां सुधार की जरूरत है। इसके अलावा आयोग को उन कर्मचारियों के पेंशन प्रावधानों पर भी विचार करना है, जो इन दोनों योजनाओं के दायरे में नहीं आते। सरकार ने आयोग को यह ध्यान रखने को कहा है कि बिना योगदान वाली पेंशन व्यवस्था से सरकारी खजाने पर कितना वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि, गजट अधिसूचना में कहीं भी NPS या UPS को खत्म कर OPS लागू करने का उल्लेख नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि आयोग का मुख्य उद्देश्य मौजूदा पेंशन व्यवस्था की समीक्षा और उसमें सुधार के सुझाव देना है।
कर्मचारी संगठन कर रहे OPS बहाली की मांग
दूसरी ओर, केंद्रीय कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स एसोसिएशन लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि NPS में मिलने वाली पेंशन बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्शदात्री मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को दिए गए ज्ञापन में NPS और UPS को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि 1 जनवरी 2004 के बाद सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा पेंशन व्यवस्था समान नहीं है और उन्हें OPS जैसी निश्चित पेंशन सुविधा मिलनी चाहिए।
UPS को लेकर भी कर्मचारियों में सीमित उत्साह
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की शुरुआत की थी, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उनके अनुसार, करीब 26 लाख NPS सब्सक्राइबर्स में से केवल लगभग 1.22 लाख कर्मचारियों ने UPS को चुना है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि कम संख्या में विकल्प चुनने से यह संकेत मिलता है कि कर्मचारी अभी भी पुरानी पेंशन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित मानते हैं।
पेंशनर्स संगठन भी उठा रहे हैं OPS का मुद्दा
कई पेंशनर्स संगठनों ने भी सरकार से OPS बहाल करने या कम से कम न्यूनतम गारंटीड पेंशन देने की मांग की है। उनकी मांगों में सरकार का अधिक योगदान, पेंशन सुरक्षा के लिए मजबूत नियम और रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय की व्यवस्था शामिल है। इन संगठनों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता के लिए ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
8वें वेतन आयोग के सामने बड़ी चुनौती
8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की मांगों के बीच संतुलन बनाना होगी। जहां सरकार मौजूदा NPS और UPS व्यवस्था में सुधार की संभावना तलाश रही है, वहीं कर्मचारी संगठन OPS की वापसी पर जोर दे रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या सुझाव देता है और क्या कर्मचारियों की मांगों को इसमें जगह मिलती है या नहीं।
