100 साल, 100 कंपनियां, 100 देश, पूरी दुनिया का हो गया "हमारा बजाज"

बजाज, ये देश के हर घर में जाना पहचाना नाम है। आजादी की लड़ाई से लेकर यूथ के पसंदीदा टू-व्हीलर तक बजाज की छाप है। जानें कैसे 100 साल में हमारा बजाज पूरी दुनिया का हो गया।

आजादी की लड़ाई से निकला एक नाम, आज दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में अपनी पहचान बना चुका है। “हमारा बजाज” अब सिर्फ एक विज्ञापन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की यादों, भरोसे और सपनों का हिस्सा है। 100 साल पहले 1926 में जब स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक जमनालाल बजाज ने जब बजाज ग्रुप को स्थापित किया, तो शायद कभी यह विचार भी नहीं होगा कि उनकी यह कंपनी दुनिया के 100 देशों तक फैल जाएगी और इस समूह में 100 से ज्यादा कंपनियां होंगी। लेकिन उन्होंने जिस वट वृक्ष की नींव रखी, उसकी छांव में ऑटोमोबाइल, फाइनेंस, इलेक्ट्रिकल्स और इंजीनियरिंग समेत कई सेक्टर्स के कारोबार हैं।

Bajaj

आजादी के संघर्ष में शामिल रहे जमनालाल बजाज

आजादी की लड़ाई से शुरू हुई कहानी

बजाज की शुरुआत सिर्फ कारोबार के लिए नहीं हुई थी। जमनालाल बजाज महात्मा गांधी के बेहद करीबी माने जाते थे और उन्हें गांधीजी का “पांचवां बेटा” तक कहा जाता था। उस दौर में बजाज सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भर भारत की सोच का हिस्सा था। इसे लेकर ग्रुप के चेयरमैन नीरज बजाज का कहना है कि भारत की आत्मनिर्भरता की शुरुआत आज की नहीं, बल्कि करीब 100 साल पहले हो गई थी, जब भारतीयों ने खुद के लिए उत्पादन और निर्माण का सपना देखा था।

End of Feed