Oldest Indian Companies: भारत में आजादी से पहले स्थापित ये 10 कंपनियां देश की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति की साक्षी रही हैं। ओटिस एलिवेटर (1853) ने आधुनिक लिफ्टों की शुरुआत की, जबकि बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग ( 1863 ) ने व्यापार को नया आयाम दिया। इलाहाबाद बैंक (1865) और पंजाब नेशनल बैंक (1895) ने वित्तीय क्षेत्र को मजबूती दी। नेस्ले (1866) और ब्रिटानिया (1892) ने खाद्य उद्योग में योगदान दिया। सेंचुरी टेक्सटाइल्स और गोडरेज (1897) ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया। कलकत्ता इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई (1899) ने देश को रोशनी दी और शालीमार पेंट्स (1902) ने भारत के कई ऐतिहासिक भवनों को रंगा। नीचे डिटेल में जानिए।
देश की पुरानी कंपनियां (प्रतीकात्मक तस्वीर- AI)
1853: ओटिस एलिवेटर कंपनी लिमिटेड (OTIS ELEVATOR CO. LTD)
अमेरिकी आविष्कारक एलिशा ग्रेव्स ओटिस ने 1852 में पहला सुरक्षित लिफ्ट (सेफ्टी एलिवेटर) बनाया। 1870 के दशक में ओटिस ने यूरोप में प्रवेश किया। इसके एलिवेटर क्रेमलिन, बालमोरल कैसल, हंगेरियन रॉयल पैलेस और एफिल टॉवर में लगाए गए। 1900 के शुरुआती वर्षों में बकिंघम पैलेस और मैसूर पैलेस में भी ओटिस एलिवेटर लगाए गए।
1863: बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BOMBAY BURMAH TRADING CORP. LTD)
बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन की स्थापना सागौन (टीक) व्यापार को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। धीरे-धीरे इसने अपना व्यापार पूरे एशिया में फैलाया। 1913 में यह चाय बागानों के व्यवसाय में उतरी, जो इसका वर्तमान मुख्य व्यवसाय है। यह वाडिया समूह की प्रमुख कंपनी है।
1865: इलाहाबाद बैंक (ALLAHABAD BANK)
भारत का सबसे पुराना संयुक्त स्टॉक बैंक, इलाहाबाद बैंक, 24 अप्रैल 1865 को तीन यूरोपीय व्यापारियों द्वारा इलाहाबाद शहर में स्थापित किया गया। इलाहाबाद बैंक और कॉर्पोरेट इंडिया साथ-साथ विकसित हुए। 1969 में, यह राष्ट्रीयकृत किए गए 14 बैंकों में से एक था।
1866: नेस्ले (NESTLÉ)
1866 में जर्मन मूल के फार्मासिस्ट हेनरी नेस्ले ने स्विट्जरलैंड के वीवे शहर में बच्चों के लिए फरीन लैक्टे (दूध और आटे का मिश्रण) बनाया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसके कंडेंस्ड मिल्क की भारी मांग रही। ग्रेट डिप्रेशन के दौरान इसकी प्रसिद्ध नेसकैफे कॉफी के कारण कंपनी बची रही। आज नेस्ले दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय पदार्थ कंपनी है।
1892: ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (BRITANNIA INDUSTRIES LTD)
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज की स्थापना ₹295 की पूंजी से ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों की जरूरतें पूरी करने के लिए हुई थी। 1910 में इसके संचालन को मशीनीकृत किया गया और 1921 में औद्योगिक ओवन लगाए गए। 1954 में, इसने उच्च गुणवत्ता वाली स्लाइस्ड और रैप्ड ब्रेड की शुरुआत की। 2000 में, ब्रिटानिया फोर्ब्स की वैश्विक सूची में शीर्ष 300 छोटी कंपनियों में शामिल थी।
1895: पंजाब नेशनल बैंक (PUNJAB NATIONAL BANK)
1895 में लाहौर में कुछ देशभक्तों और दूरदर्शियों, जिनमें लाला लाजपत राय और ईसी जेसावाला शामिल थे, द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य यह था कि भारतीय पूंजी का उपयोग अंग्रेजी बैंकों और कंपनियों के संचालन में न हो। 1944 में, पीएनबी भारत का पहला बैंक बना जिसने टेलर प्रणाली शुरू की।
1897: सेंचुरी टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (CENTURY TEXTILES AND INDUSTRIES LTD)
1897 में एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित, सेंचुरी टेक्सटाइल्स के पास 1951 तक केवल एक यूनिट थी, एक कपास की मिल। इसके बाद इसने यार्न, डेनिम, पल्प और पेपर उद्योगों में तेजी से प्रगति की। 2016 में, इसे IMC रामकृष्ण बजाज नेशनल क्वालिटी बेस्ट प्रैक्टिसेज अवॉर्ड मिला।
1897: गोडरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड (GODREJ AND BOYCE MANUFACTURING CO. LTD)
1897 में अर्देशिर गोडरेज ने ताले, सेफ और सुरक्षा उपकरण बनाने की शुरुआत की। 1918 में, कंपनी ने चावी नामक साबुन लॉन्च किया, जो दुनिया का पहला साबुन था जो वनस्पति तेल से बना था। 1951 में, भारत के पहले आम चुनाव के लिए बैलट बॉक्स बनाने का काम भी इसी कंपनी को सौंपा गया।
1899: कलकत्ता इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉर्पोरेशन (CALCUTTA ELECTRICITY SUPPLY CORPORATION)
कलकत्ता इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉर्पोरेशन (अब सीईएससी लिमिटेड) की स्थापना ब्रिटिश सरकार ने भारत के आधुनिकीकरण के प्रयास के तहत की थी। 1911 तक ब्रिटिश भारत की राजधानी रहे कलकत्ता (अब कोलकाता) भारत का पहला ऐसा शहर बना जिसे पूरी तरह विद्युतीकृत किया गया।
1902: शालीमार पेंट्स लिमिटेड (SHALIMAR PAINT COLOUR AND VARNISH CO.)
1902 में हावड़ा में एएन टर्नर और एएन राइट द्वारा स्थापित इस कंपनी का मूल नाम शालीमार पेंट कलर एंड वार्निश कंपनी था। इसने एविशन कोटिंग्स, मरीन पेंट्स और थर्मल पावर प्लांट्स की पेंटिंग में अग्रणी भूमिका निभाई। राष्ट्रपति भवन, हावड़ा ब्रिज और साल्ट लेक स्टेडियम आज भी शालीमार पेंट्स से रंगे जाते हैं।
