RBI MPC की 10 बड़ी बातें, जानें महंगाई-GDP-LPG को लेकर रिजर्व बैंक ने क्या बोला?

भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती महंगाई के जोखिम के कारण रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अनचेंज्ड रखा है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6% और खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक के नतीजे आ चुके हैं। इस बार गिरते रुपये को संभालने और वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करने की बड़ी चुनौती आरबीआई के सामने थी। बाजार में इस बात के कयास तेज थे कि केंद्रीय बैंक शायद ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कड़ा कदम उठा सकता है, लेकिन आरबीआई ने रेपो रेट को पुराने स्तर पर बरकरार रखकर आम आदमी को लोन की महंगी ईएमआई (EMI) से फिलहाल राहत दी है। हालांकि, ब्याज दरों को स्थिर रखने के साथ ही आरबीआई ने देश की विकास दर (GDP) और आने वाली महंगाई को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं, जिन्हें देश के हर नागरिक और निवेशक के लिए समझना बेहद जरूरी है।

RBI MPC

RBI MPC की बड़ी बातें

  • रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.00 प्रतिशत और बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर बनी रहेगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति को लेकर अपने न्यूट्रल स्टांस (तटस्थ रुख) को भी बरकरार रखा है।
  • जीडीपी (GDP) ग्रोथ का नया अनुमान: वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की वास्तविक जीडीपी (GDP) विकास दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत लगाया गया है। तिमाही के आधार पर देखें तो पहली तिमाही में इसके 6.6% और दूसरी तिमाही में 6.3% रहने की उम्मीद है।
  • सालाना खुदरा महंगाई का लक्ष्य: केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही इस पूरे वित्त वर्ष के लिए कोर इंफ्लेशन (मुख्य महंगाई दर) के 4.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, मानसून सामान्य से कम रहने के अनुमान और अल नीनो (El Niño) की स्थिति से इस पर जोखिम बना हुआ है।
  • तिमाही के आधार पर महंगाई का ग्राफ: आरबीआई के अनुमान के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में महंगाई दर थोड़ी कम यानी 4.2% के स्तर पर रह सकती है। इसके बाद दूसरी तिमाही में इसमें तेजी आएगी और यह बढ़कर 5.1% तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। वहीं तीसरी तिमाही में यह अपने चरम 5.9% पर होगी, जो चौथी तिमाही से घटकर 5.4% पर आ सकती है।
  • वैश्विक संकट और महंगी ऊर्जा का असर: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर बुरा असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ऊर्जा की इन ऊंची कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण ही भारत की विकास दर का अनुमान घटाना पड़ा है।
  • त्पादन लागत बढ़ने से कीमतों पर दबाव: कच्चे तेल, कमर्शियल एलपीजी, बेस मेटल्स, केमिकल, रबर और प्लास्टिक जैसे औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इन जरूरी इनपुट्स के महंगे होने की वजह से देश के भीतर उद्योगों की उत्पादन लागत (Input Costs) काफी बढ़ गई है। कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ सकती है।
  • घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती और लचीलापन: वैश्विक स्तर पर चल रही तमाम उथल-पुथल और झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति काफी बेहतर है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई (PMI) के आंकड़े बताते हैं कि दोनों ही सेक्टर में मजबूती और सकारात्मक माहौल बना हुआ है। प्राइवेट कंजम्पशन (निजी खपत) और फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट में बढ़त की वजह से घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।
  • बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति: अप्रैल 2026 में हुई पिछली बैठक के बाद से बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) की स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है। इस दौरान बैंकों के पास औसतन 2.63 लाख करोड़ रुपये का दैनिक सरप्लस (अतिरिक्त नकदी) दर्ज किया गया है। आरबीआई ने बाजार की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने के लिए सिस्टम में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने की बात कही है।
  • विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के नए उपाय: सरकार और आरबीआई ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) के दायरे को बढ़ा दिया है। अनिवासी भारतीयों (NRIs) और ओसीआई (OCIs) के लिए बिना सेबी रजिस्ट्रेशन शेयर बाजार में निवेश की सीमा को भी बढ़ाया गया है। इसके अलावा सरकारी कंपनियों (PSUs) को लोन के लिए रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप की सुविधा सितंबर 2026 तक मिलेगी।
  • विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सचेंज रेट नीति: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 29 मई 2026 तक 682.3 अरब डॉलर के बेहद मजबूत और सुरक्षित स्तर पर है। यह फंड देश के लगभग 11 महीने के आयात खर्च (Import Cover) और बाहरी कर्ज को चुकाने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। आरबीआई किसी खास एक्सचेंज रेट को टारगेट नहीं करता, बल्कि बाजार में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकता है।

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